पत्नी को टिकट न मिलने पर नाराज हुए थे सिद्धू
तीसरी बार 2019 के लोकसभा चुनाव में विवाद खड़ा हुआ। इस विवाद की जड़ बनी पटियाला संसदीय सीट। टिकट न मिलने पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। सिद्धू ने भी इसका समर्थन किया। इसके बाद नाराज हुए अमरिंदर ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद सिद्धू की ख्वाहिश मुख्यमंत्री बनने की है।
सक्रिय राजनीति से हुए दूर
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पंजाब में आठ ही सीटें जीती। हार का ठीकरा सिद्धू के सिर पर फोड़ा गया। लोकसभा चुनाव के बाद कैप्टन ने मंत्रीमंडल की बैठक ली। हार के जिम्मेदार बताए जाने से आहत सिद्धू उसमें नहीं आए। नाराज कैप्टन ने उनसे स्थानीय निकाय विभाग छीन लिया और उन्हें बिजली मंत्री बना दिया। भड़के सिद्धू ने जुलाई 2019 में मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया और लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।
हाईकोर्ट के फैसले से आया पंजाब कांग्रेस में भूचाल
अपने वनवास के दौरान उन्होंने ‘जीतेगा पंजाब’ यूट्यूब चैनल खोला जिसमें वह पंजाब से जुड़े मुद्दे उठाने लगे। पिछले साल शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद सिद्धू सक्रिय राजनीति में लौटे। इसके बाद अप्रैल में हाईकोर्ट ने 2015 में बेअदबी घटना का विरोध कर रहे लोगों पर कोटकपूरा में फायरिंग मामले की जांच कर रही एसआईटी को रद्द कर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसी फैसले ने पंजाब कांग्रेस में कलह की नींव रख दी।
हाशिये पर गए सिद्धू को कैप्टन का घेराव करने का मौका मिल गया। जोर शोर से कैप्टन के खिलाफ उतरे सिद्धू ने उन्हें अयोग्य मुख्यमंत्री तक कह डाला। इससे नाराज कैप्टन ने उन्हें पटियाला से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी। लेकिन इस बार मामला पेचीदा हो गया क्योंकि सिद्धू के साथ कई मंत्री और विधायक भी कैप्टन के खिलाफ खड़े हो गए। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तो मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ही मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा थमा दिया था। वहीं कैप्टन के खिलाफ आवाज उठाने वाले विधायक परगट सिंह और चरणजीत चन्नी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो मामला और भड़क गया।