केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार भी पंजाब के किसी शहर के टॉप-100 में आने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। सर्वे का काम जनवरी 2018 केपहले सप्ताह में शुरू होगा। लेकिन सूबे में कोई खास तैयारी नहीं है। 2017 केसर्वेक्षण में पंजाब में पहले स्थान पर रहे मोहाली का 121वां स्थान था। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की टीमें जनवरी के पहले हफ्ते में सफाई का सर्वे करने पंजाब आ जाएंगी, मार्च अंत में नतीजा घोषित कर दिया जाएगा।
पिछले साल 434 शहरों में सर्वे हुआ था, इस बार 4041 शहरों में किया जाएगा। पिछले एक साल में पंजाब के शहरों के हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन में पांच कम्पोनेंट हैं, जिनके आधार पर रेटिंग की जाएगी। सूबा इनमें से ज्यादातर में पिछड़ा है। इनमें घरों में शौचालयों का निर्माण, सामुदायिक व पब्लिक टॉयल, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, जन जागरूकता और क्षमता निर्माण, प्रशासनिक व कार्यालय खर्च शामिल हैं। इनके लिए केंद्र सरकार की ओर से ग्रांट जारी की जा चुकी है।
राज्य सरकार ने भी अपना हिस्सा जारी कर दिया है। लेकिन पूरी राशि ही खर्च नहीं हुई है। सिर्फ 57.64 करोड़ खर्च हुए, 66.57 करोड़ अभी पड़े हुए हैं। इसी तरह कई निकायों ने राशि जारी होने के बाद भी टॉयलेट नहीं बनवाए, कुछ जगह तो अभी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। सिर्फ बठिंडा में ही टॉयलेट बन सके हैं। सरकार के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। इस बार पंजाब से मोहाली के टॉप 100 में दाखिल होने की उम्मीद की जा सकती थी। लेकिन वहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हुआ है।
सर्वे में इसके काफी मार्क्स है। पंजाब के ज्यादातर शहर केंद्र के मानकों पर खरे नहीं उतरते। ऐसे में इस साल भी पंजाब का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहने के आसार नहीं हैं। निकाय विभाग ने जागरूकता के लिए फंड जारी किए हैं। वहीं, कैपेसिटी बिल्डिंग के तहत ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए। 42 कम्यूनिटी फेसिलिटेटर-कम-प्रोग्राम कॉर्डिनेटर नियुक्त किए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्य में एक हजार लोगों को ट्रेनिंग दी है।