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'पैसा नहीं चाहिए बेटे को वापस ला दो'

Sun, 22 Jun 2014 07:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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इराक में गृह युद्ध के कारण वहां की कंपनियों में रोजगार के लिए गए भारतीय युवकों के परिजन दिन-रात उनकी सुरक्षित वापसी की दुआ मांग रहे हैं।
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इराक गए राजपुरा के चार युवक गांव मंडवाल निवासी हरदीप सिंह पुत्र स्व. गुरमेल सिंह, गांव भेडवाल निवासी कुलदीप सिंह पुत्र स्व. गुरमीत सिंह, हरदीप सिंह पुत्र साधा सिंह और जगदीप सिंह पुत्र बलकार सिंह के परिजनों का कहना है कि उन्हें पैसों की जरूरत नहीं है। उन्हें तो अपने बच्चे सही सलामत अपनी आंखों के सामने चाहिए।

राजपुरा माल विभाग के कानूनगो बलविंदर सिंह सैनी और हलका पटवारी सुरिंदर सिंह मंडल शनिवार को युवकों के परिजनों से मिले। परिजनों को सरकार की और हर प्रकार के सहयोग देने का आश्वासन दिलाया गया।
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एनआरआई विभाग के मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने बताया कि हर जिले के डीसी को आदेश जारी किए गए हैं कि वह इराक में गए युवकों के परिजनों से संपर्क करें और उन्हें सरकार की और से पूरा आश्वासन देने की बात कहें।
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बेटे के गम में घर में चूल्हा तक नहीं जला

गांव मंडवाल निवासी निर्मला देवी ने बताया कि कि दो दशक पहले उसके पति गुरमेल सिंह की मौत के बाद उसका बेटा हरदीप सिंह करीब चार साल पहले हरियाणा के गांव भूरेवाला तहसील नारायण गढ़ के एजेंट ने 65 हजार रुपये में इराक की कंपनी में काम के लिए भेजा था।

अब मौजूदा हालात में बेटे का फोन आता है तो वह घबराहट में बात भी पूरी नहीं कर पाता। खबरें आने के बाद दो दिन से घर में चूल्हा तक नहीं जला है। हमें पैसों की जरूरत नहीं, बस हमारा बेटा वापस आ जाए।

बिना पैसे, इराक से हम कैसे निकलें

हम यहां बहुत दुखी हैं। हमारा बगदाद से निकलना मुश्किल हो गया है। न तीन माह से तनख्वाह मिली है न ही ओवर टाइम का पैसा। कंपनी के कर्मचारी भी भाग खड़े हुए हैं। समझ में नहीं आ रहा भारत कैसे लौटें? यह जानकारी इराक के बगदाद में फंसे अंबाला के गांव बखेड़ी के बलदेव ने अपने भाई मोहित कुमार को फोन पर दी।

बलदेव के भाई मोहित ने बताया कि उनके पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं और वह तीन भाई हैं। बलदेव की अभी शादी नहीं हुई है। उसे इराक गए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। बलदेव ने फोन पर बताया था कि यहां हालात काफी खराब हो चुके है। निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है।

खाने-पीने के भी लाले पड़े हुए है। उनको समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें?। मोहित ने बताया कि जब से उन्होने इराक की घटना के बारे में सुना है, तभी से पूरा परिवार दहशत में है। मोहित की शुक्रवार शाम बलदेव से बात हुई थी लेकिन उसके बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

कई बार फोन करने की कोशिश की, मगर फोन नहीं लग रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस मामले में जल्द ही कोई कार्रवाई की जाए ताकि सभी भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा सके।
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घरवालों से बात करने पर होती है पिटाई

बंदूक और जबरदस्त पिटाई के खौफ ने भारत में रह रहे घरवालों से बात करना छुड़वा दिया है। अगर कंपनी के अधिकारियों को पता चलता है कि किसी भारतीय ने अपने परिजनों से फोन पर बात की है, तो उसकी कनपटी पर बंदूक तानकर उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है, साथ ही जबरदस्त पिटाई भी की जाती है। यह दर्द गांव उधमगढ़ निवासी रविंद्र कुमार ने अमर उजाला के साथ फोन पर साझा किया। वह फिलहाल इराक के बसरा शहर में फंसा है।

बकौल रविंद्र इराक में दिन प्रतिदिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कंपनी ने करीबन 150 भारतीयों को बंधक बनाया हुआ है। रविंद्र के मुताबिक उन्हें सुबह के समय दो तथा शाम को तीन रोटियां दी जा रही हैं। 48 डिग्री तापमान होने के बावजूद पीने का पानी शाम को दिया जाता है।

रविंद्र ने बताया कि 27 बाई 12 फुट के कमरे में 28 भारतीयों को ठूंसठूंस कर भरा हुआ है। कमरे में पंखे की भी व्यवस्था नहीं है। रविंद्र ने बताया कि अगर कोई भारतीय अपने परिजनों से फोन पर बात करता है, तो उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है।
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