अस्थाना द्वारा उठाए गए सवाल
- क्या एसटीएफ पर जांच करने के लिए कोई रोक है, क्योंकि सीलबंद रिपोर्ट का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।
- क्या एसटीएफ पटियाला और फतेहगढ़ जिले में दर्ज मादक पदार्थों के मामलों को ले सकती है।
- हरप्रीत सिंह सिद्धू को ड्रग मामलों की जांच करने वाली एसटीएफ का प्रमुख क्यों लगाया गया, जबकि उनके बिक्रम सिंह मजीठिया से पारिवारिक रिश्ते हैं।
- क्या उन मामलों में आगे की जांच का आदेश दिया जा सकता है, जहां मुकदमा पहले ही समाप्त हो चुका है।
- क्या इन मामलों में उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एसआईटी को छोड़कर किसी अन्य अधिकारी द्वारा पुन: आगे की जांच की जा सकती है।
- अस्थाना ने पूछा है कि इस मामले में अब आगे बढ़ने से पहले राज्य के एडवोकेट जनरल से राय क्यों नहीं मांगी जा रही है।
- जब एसआईटी की रिपोर्ट हाईकोर्ट में सीलबंद तथ्य के रूप में दाखिल है तो इस रिपोर्ट पर आगे बढ़ने का क्या औचित्य है।
- सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने सीलबंद रिपोर्ट वापस भी मांगी लेकिन कोर्ट ने इसे लौटाने से इंकार कर दिया है। इस तरह हाईकोर्ट में पूरा मामला लंबित है और उस पर 11 जनवरी 2022 को सुनवाई होनी है, इसके बाद इस पर आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं रह जाता।
- अस्थाना ने यह भी कहा है कि जब ड्रग मामले में दर्ज सभी एफआईआर की जांच और पुन: जांच कर फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है, तो जांच या पुन: जांच के आदेश कैसे दिए जा सकते हैं।
अस्थाना के बजाय जूनियर अफसर के सहारे कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने ड्रग मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से अब इनवेस्टिगेशन ब्यूरो में अस्थाना से जूनियर अफसर आईजी गौतम चीमा को आगे लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पंजाब पुलिस के डीजीपी इकबाल प्रीत सिंह सहोता के बीच बैठक भी हुई है। उल्लेखनीय है कि गौतम चीमा पर रेप मामले का केस लंबित है और सरकार अब उन्हें अपने दबाव में लेकर ड्रग मामले में नया काम करना चाह रही है