पिता और भाई भी अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट में शामिल
मनी कालरा ने पूछताछ में बताया कि उसके पिता सुरेंद्र कालरा और भाई सनी कालरा भी अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के लिए कम कर रहे थे। बॉर्डर पार से आने वाली ड्रग्स के बेचे जाने के बाद उससे मिलने वाली रकम को वह हवाला के जरिए भारत से यूएई भेजता था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक मनी कालरा ने इंपैक्स समेत कई अन्य नामों से फर्जी कंपनियां बना रखी थीं।
इसी तरह विदेश में बैठे उसके भाई सनी कालरा ने वहां जाली कंपनियां बना रखी हैं। इन जाली कंपनियों के जरिए समान का आर्डर कर पैसे ट्रांसफर किए जाते थे जबकि हकीकत में कंपनी में न तो कुछ बनता था और न ही कुछ सप्लाई होता था। इस तरह से आरोपी मनी कालरा ने 300 से 350 करोड़ की ड्रग मनी भारत से यूएई इन्हीं जाली कंपनियों के माध्यम से हवाला के जरिए भेज चुका है।
पंजाब से सटे सीमांत इलाकों में ड्रोन से मंगाते थे ड्रग्स
पुलिस के मुताबिक पंजाब के साथ ट्राइसिटी में सप्लाई की जा रही हेरोइन पाकिस्तान से भारत में अटारी और अन्य सीमांत इलाकों के जरिए लाई जाती थी। यह गिरोह पाकिस्तान से ड्रोन और नदियों के जरिए प्लास्टिक बोतलों में ड्रग्स मंगवाता था। गिरोह आपस में बातचीत के लिए व्हाट्सएप और वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करता था। पुलिस के मुताबिक हवाला के माध्यम से यूएई और वहां से पाकिस्तानी तस्करों तक ड्रग मनी पहुंचाई जाती है।
रकम का टेरर फंडिंग में इस्तेमाल होने का भी संदेह
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी हवाला के जरिए करोड़ों की ड्रग्स मनी यूएई के रास्ते इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट तक पहुंचाते थे। आशंका है कि करोड़ों की ड्रग मनी का इस्तेमाल टेरर फंडिंग में भी किया गया होगा।