भारतीय वायुसेना अपने समृद्ध इतिहास को संरक्षित करने के लिए एयर फोर्स से जुड़े तमाम अभिलेखों के संग्रह को डिजिटल करने जा रही है।
इंडियन एयरफोर्स ने देश के पहले स्वदेशी जेट लड़ाकू विमान एचएएल एचएफ-24 मारुत के नाम से एक नई परियोजना प्रोजेक्ट मारुत शुरू की है। इसके तहत वायुसेना के मिशन, ऑपरेशन और ऐतिहासिक अभिलेखों का ऐसा आर्काइव तैयार होगा, जिसके आधार पर रक्षा से जुड़े लोगों के अलावा सिविल हिस्टोरियन भी रिसर्च कर सकेंगे।
इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक अभिलेखों को एकत्रित कर उन्हें डिजिटलाइज्ड करना है, जिससे उन्हें अनुसंधान और अध्ययन के लिए सुलभ बनाया जा सके। रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का मकसद भारतीय वायुसेना के इतिहास को संरक्षित करने के साथ ऐतिहासिक मूल्य के ऐसे दुर्लभ रत्नों को ढूंढना है, जो देशभर में बिखरे हुए हैं।
भारतीय वायुसेना ने अपने इतिहास कक्ष में रखे गए सभी रिकॉर्ड को पहले ही संग्रहीत कर लिया है, जिनमें अवर्गीकृत फाइलें, तस्वीरें, मिशन रिपोर्ट, परिचालन अध्ययन आदि शामिल हैं। अब इन्हें डिजिटल किया जाएगा ताकि यह सबके लिए सुलभ हो सके। कुछ प्राचीन तस्वीरों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। दस्तावेजों को स्कैन किया जा रहा है, ताकि इन्हें डिजिटल प्रारूप में संरक्षित करने के साथ-साथ वायु योद्धाओं, वायुसेना से जुड़े दिग्गजों, शिक्षाविदों और सिविल सैन्य इतिहासकारों को अनुसंधान के लिए उपलब्ध करवाया जा सके।
देश के हर एयर फोर्स स्टेशन पर मिलेगी जानकारी
जानकारी के इस भंडार को बढ़ाने के लिए भारतीय वायुसेना ने एयरफोर्स से जुड़े दिग्गजों को उनकी व्यक्तिगत यादें, तस्वीरें, लॉग बुक आदि साझा करके इस प्रयास में योगदान देने का भी अनुरोध किया है। भारतीय वायुसेना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इससे इंडियन एयरफोर्स के समृद्ध इतिहास की एक सर्वव्यापी तस्वीर विकसित करने में मदद मिलेगी। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड देश के किसी भी निकटतम एयर फोर्स स्टेशन में उपलब्ध रहेगा। भारतीय वायुसेना से जुड़े अनुभवी इस परियोजना के लिए projectmarut@gmail.com पर सामग्री भेज सकते हैं।