पंचकूला की जिला अदालत से धोखाधड़ी के मामले में मिली नियमित जमानत को रद्द करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब हाईकोर्ट में आरोपी की याचिका लंबित हो तो निचली अदालत आरोपी को जमानत नहीं दे सकती है। हाईकोर्ट में लंबित अग्रिम जमानत याचिका को भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
दिसंबर 2020 में पंचकूला के सेक्टर-5 थाने में 55 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी रश्मी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने याचिका लंबित रहते उसे अंतरिम जमानत दे दी थी और जांच में शामिल होने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद याची जांच में शामिल हो गई और नियमित जमानत की मांग को लेकर जिला अदालत में याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लंबित होने के बावजूद जिला अदालत ने उसे 12 अप्रैल 2022 को नियमित जमानत दे दी।
हाईकोर्ट ने जिला अदालत द्वारा दी गई जमानत के आदेश को गलत करार देते हुए इसे रद्द कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट में लंबित अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अब याची को जिला अदालत के सामने समर्पण करने का आदेश दिया है। साथ ही अधीनस्थ अदालतों में इस तरह की प्रथा को बंद करने के लिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी न्यायाधीशों को इस आदेश की प्रति भेजने का हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को आदेश दिया है।