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हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली, मुश्तेखाक है फानी रहे न रहे

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चंडीगढ़। हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली, मुश्ते-खाक है फानी रहे न रहे... यह शेर शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने आखिरी वक्त पर कहा था। जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक भगत सिंह के विचार जीवित रहेंगे। जब भगत सिंह थे भारत की आबादी 32 करोड़ थी। वे पीड़ित समाज के आवाज थे। जब भी अदालत में खड़े होकर बोलते थे या अपनी कलम से लिखते थे तो उसमें पीड़ित समाज की आवाज होती थी। यह कहना है सेवानिवृत्त प्रोफेसर एमएम जुनेजा का।
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उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह युवाओं के लिए बहादुरी के प्रतीक थे। इस बात से समझा जा सकता है कि 17 दिसंबर 1928 को लाहौर के पुलिस हेडक्वार्टर के सामने अंग्रेज जेपी सांडर्स को राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद ने मिलकर मौत के घाट उतारा था। उन्होंने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया था। गरीबों के खिलाफ जब सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली नई दिल्ली में बिल पेश किया जा रहा था तो उसका विरोध करने के लिए शहीद भगत सिंह ने 8 अप्रैल 1929 में अपने क्रांतिकारी साथी बीके दत्त के साथ मिलकर बाहरी सरकार को जगाने के लिए बम धमाका किया था। उसके बाद उन्होंने खुद को गिरफ्तार करवाया। जेल के अंदर 467 दिन रहते हुए 12 जून 1929 को उम्र कैद की सजा सुनाई गई और 7 अक्तूबर 1930 को मौत की सजा सुनाई गई।
शहादत की खबर सुनकर माताओं ने बच्चों को दूध तक नहीं पिलाया
23 मार्च 1931 को वे 23 वर्ष पांच महीना और 25 दिन के थे जब उन्हें लाहौर के सेंट्रल जेल में राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दी गई। तीनों शहीदों के पार्थिव शरीर को फिरोजपुर के हुसैनीवाला स्थान पर जलाकर सतलुज दरिया में पुष्प अस्थियां फेंकी गईं। उनकी शहादत का दुखभरा समाचार सुनकर पूरे देश में मातम छा गया। लोगों के घरों में चूल्हे नहीं जले। माताओं ने अपने बच्चों को दूध तक नहीं पिलाया था।
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भगत सिंह के विचार को कोई नहीं कुचल सकता
भगत सिंह के विचारों को न ब्रिटिश सरकार समाप्त कर पाई और न ही आज के सरकार कुछ कर सकती है। ज्यों ज्यों दिन बीतते जाएंगे त्यों त्यों शहीद-ए-आजम भगत सिंह के विचारों की लोकप्रियता युवा पीढ़ी में बढ़ती ही जाएगी।
कौन हैं प्रोफेसर जुनेजा
प्रोफेसर एमएम जुनेजा जाट पीजी कॉलेज हिसार से इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष पद से वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने राजनीति शास्त्र और इतिहास में एमए और पीएचडी की है। आजकल भगत सिंह स्कूल ऑफ लर्निंग पंचकूला के संस्थापक अध्यक्ष होने के नाते युवा पीढ़ी में भगत सिंह के कार्यों व विचारों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। उनके अनेक शोध-लेखों के अतिरिक्त 28 से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने शहीद भगत सिंह के बारे में कई किताबें लिखी हैं।
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