एक दूसरे पर निगरानी करेंगे अधिकारी: एचपीएससी ने गोपनीय कार्यों की शक्ति को लेकर भी अहम फैसला लिया है। पहले परीक्षा की गोपनीयता के लिए सचिव या उप सचिव ही जिम्मेदार होता था। अब शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया गया है। गोपनीयता भंग न हो इसके लिए चार अलग-अलग अधिकारियों को गोपनीय कार्य देकर एक दूसरे की निगरानी सौंपी गई है। अगर कोई एक गड़बड़ी को कोशिश करता है तो दूसरा उसे पकड़ सकेगा।
परीक्षा के तुरंत बाद होगी ओएमआर की स्केनिंग
अब भर्ती परीक्षा के तुरंत बाद ही सभी ओएमआर शीट स्कैन कराई जाएंगी। इस रिकॉर्ड को एक पेन ड्राइव में रखा जाएगा। जब परीक्षा का परिणाम जारी किया जाएगा तो पहले और बाद के रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। ऐसे में परीक्षा के बाद गड़बड़ी आशंका खत्म हो जाएगी।
नागर की गिरफ्तारी के बाद लिया फैसला
नवंबर माह में एचपीएससी के उप सचिव अनिल नागर व उसके दो साथियों को विजिलेंस ने लाखों रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। इन पर डेंटल सर्जन की भर्ती और एचसीएस प्रारंभिक परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगे थे। उप सचिव के पास ही गोपनीय शाखा की पूरी जिम्मेदारी थी और वह परीक्षा के बाद ओएमआर शीट में गड़बड़ी करके अभ्यर्थियों को पास कराता था। आयोग के चेयरमैन आलोक वर्मा ने कहा कि परीक्षाओं की पवित्रता और पारदर्शिता के लिए बदलाव किए गए हैं।