चंडीगढ़। चंडीगढ़ के पूर्व डीजीपी संजय बेनीवाल के कार्यकाल में आउट ऑफ टर्न जाकर किन-किन पुलिसकर्मियों को 200 सरकारी मकान आवंटित किए गए, इसकी जानकारी पुलिस विभाग 21 दिन में याचिकाकर्ता को दे और हमें भी सूचित करे। यह आदेश केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने चंडीगढ़ पुलिस विभाग को दिया है। आदेश देते हुए आयोग ने कहा कि सरकारी मकान का आवंटन एक पब्लिक डीलिंग है और आरटीआई एक्ट के तहत इसकी जानकारी देना जरूरी है। इससे आवास आवंटन में भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और पारदर्शिता आएगी।
चंडीगढ़ पुलिस के हवलदार जगजीत सिंह ने आरटीआई के तहत पुलिस विभाग से जानकारी मांगी थी कि तत्कालीन डीजीपी संजय बेनीवाल के कार्यकाल में आउट ऑफ टर्न जाकर दिए गए 200 सरकारी मकान किन-किन पुलिसकर्मियों को दिए गए। जगजीत सिंह ने सभी पुलिसकर्मियों के नाम, बेल्ट नंबर और आउट ऑफ टर्न के लिए दी गई रिक्वेस्ट की फोटो कॉपी, नियुक्ति की तारीख और नोटिंग पेज की जानकारी मांगी थी लेकिन विभाग ने यह कहते हुए उनकी अपील खारिज कर दी कि यह थर्ड पार्टी इन्फार्मेशन है, इसलिए उन्हें सूचना नहीं दी जा सकती।
जगजीत ने आरोप लगाया था कि डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपये में एक मकान दिए गए हैं। उन्होंने 27 जून 2018 से लेकर 15 अगस्त 2020 तक की जानकारी मांगी थी। उन्होंने मेडिकल और मृतकों के परिजनों को दिए गए मकानों के अलावा आउट आउट ऑफ टर्न जाकर दिए गए मकानों की जानकारी मांगी थी। उनका आरोप था कि संजय बेनीवाल और अन्य ने मिलकर मकानों को गलत तरीके से आवंटित किया है। जब पुलिस विभाग से जानकारी नहीं मिली तो जगजीत सिंह ने केंद्रीय सूचना आयोग दिल्ली का दरवाजा खटखटाया।
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छह महीने में 35 और तीन साल के कार्यकाल में 200 मकान आवंटित किए
जगजीत सिंह की आरटीआई पर पुलिस विभाग ने बताया कि तत्कालीन डीजीपी संजय बेनीवाल के छह माह के कार्यकाल में आउट ऑफ टर्न जाकर 35 मकान दिए गए हैं। इसके बाद जगजीत ने संजय बेनीवाल के तीन साल के कार्यकाल के दौरान आउट ऑफ टर्न जाकर अलॉट किए गए मकानों की जानकारी मांगी। विभाग ने बताया कि इस दौरान 200 मकान आवंटित किए गए हैं लेकिन
किन पुलिसकर्मियों को मकान दिए गए, इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
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हाईकोर्ट में भी चल रहा है यह मामला
जगजीत सिंह ने इस मामले में सीबीआई को शिकायत देकर जांच की मांग की थी लेकिन सीबीआई ने इस पर जांच नहीं शुरू की। इसके बाद जगजीत सिंह हाईकोर्ट गए और इस केस में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई से जांच शुरू करने की मांग की। यहमामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई अगस्त में है।