चंडीगढ़। अमर उजाला कार्यालय में वीरवार को अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे का आयोजन हुआ। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में शहर की नर्सिंग ऑफिसरों ने काम का तनाव दूर रखकर सहयोगियों से मन की बात साझा की। नर्सों ने कहा कि अस्पताल उनका दूसरा घर है। मरीजों के साथ वह खुद के परिवार से ज्यादा समय व्यतीत करती हैं। मरीजों को ठीक होकर घर जाते देखना सुखद लगता है, यही उनका सबसे बड़ा उपहार है।
नर्सों ने केक काटकर फ्लोरेंस नाइटेंगिल का जन्मदिन मनाते हुए एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। इस दौरान कार्य स्थल के खट्टे-मीठे किस्से सुनाने साथ उन्होंने मन की ढेरों अनकही बातें सांझा भी कीं। इस अवसर पर पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 की नर्सिंग ऑफिसरों ने घर और ड्यूटी के बीच सामंजस्य स्थापित करने के दौरान होने वाली समस्याएं बताने के साथ-साथ उसका समाधान भी सुझाया। मौके पर मौजूद सीनियर नर्सिंग ऑफिसरों ने युवा नर्सेज को काम के दौरान होने वाले तनाव के प्रबंधन के टिप्स भी दिए। उन्होंने कोविड के दौरान पीपीई किट में संक्रमण के खतरे के बीच 12 से 18 घंटे तक लगातार की गई ड्यूटी के बारे में बताया। नर्सों ने मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या और मानव संसाधन की कमी के कारण होने वाली परेशानी से भी रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि परिवार और खासतौर पर बच्चों को समय न दे पाने का उन्हें मलाल तो है, पर इस बात की खुशी है कि वे उस समय का उपयोग कर मरीजों की जान बचाने में योगदान दे रही हैं।
इनसेट
ज्योति रानी ने नर्सिंग प्रोफेशन पर खुद की लिखी कविता सुनाई
लोगों की नजर में नर्सिंग एक इजी टास्क है, पर कोई हमसे पूछे ये हमारे लिए कितना खास है,
हॉस्पिटल तो देखो सारा नर्सेज ही चलाती हैं, इसलिए हार्ट ऑफ द हॉस्पिटल कहलाती हैं,
अपने सेवा भाव से सबको खुश कर जाती हैं, इसलिए पेशेंट के लिए बेटा और बेटी बन जाती हैं।
ड्यूटी के साथ-साथ मानवता का फर्ज निभाती हैं, जिनती चाहे थक जाए पर हैप्पी फेस के साथ घर जाती हैं।।
कोट...
परिवार और खुद के लिए समय नहीं मिलता
मरीजों के साथ ही सारा समय निकल जाता है, परिवार और अपने लिए समय ही नहीं मिलता। ड्यूटी खत्म होने के बाद भी हर समय तनाव बना रहता है, कहीं कोई इमरजेंसी नहीं आ जाए।
-ज्योति रानी, नर्सिंग ऑफिसर पीजीआई
मरीजों की परिवार की तरह करते हैं देखभाल
हम जैसे अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल करते हैं, उतने ही प्यार और करुणा के साथ मरीजों की देखभाल करते हैं। परिवार और अस्पताल में तालमेल बनाकर जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलना पड़ता है।
-मनदीप कौर सैनी, नर्सिंग ऑफिसर पीजीआई
खुद को तनावमुक्त रखना चुनौती
नर्सिंग स्टाफ को हर समय खुद को तनावमुक्त रखना पड़ता है। अस्पताल में मरीज के साथ देखी परेशानियों को घर नहीं लेकर जा सकते और घर की समस्याओं व तनाव को मरीज की देखभाल करते समय नहीं जाहिर कर सकते।
-लोएस रेणुका, नर्सिंग ऑफिसर पीजीआई
कर्तव्य से प्यार नहीं तो सब बेकार
नर्सिंग के पेशे में अगर आपको अपने काम से प्यार नहीं है तो फिर सब बेकार है। मरीजों को प्यार और करुणा से देखने के लिए ड्यूटी के प्रति सेवाभाव और प्यार होना बहुत जरूरी है।
-आकाशदीप, नर्सिंग ऑफिसर जीएमएसएच-16
परिवार का सहयोग बहुत जरूरी
नर्सिंग में दिन-रात की ड्यूटी लगती है, ऐसे में परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है। परिवार का साथ होने पर ड्यूटी को तनाव मुक्त होकर कर किया जा सकता है।
-परमिंदरजीत थिंड कौर, नर्सिंग ऑफिसर जीएमएसएच-16
खुद को मानसिक तौर पर करते हैं मजबूत
नर्स पर घर-परिवार के साथ ही अपने मरीजों की जिम्मेदारी भी होती है। ऐसे में दोनों जगह काम के दौरान तनाव होना लाजिमी है। इसमें दोनों जगह से सहयोग की अपेक्षाओं के साथ खुद को हौसला देकर मानसिक तौर पर मजबूत करते हैं।
-मधु बाला, नर्सिंग ऑफिसर पीजीआई
हमारी समस्याओं के समाधान का भी पुख्ता इंतजाम हो
अस्पताल में जिसे देखो नर्स को ही शिकायत सुनाता रहता है। मरीज को परेशानी होने पर परिजन तो व्यवस्था प्रभावित होने पर सीनियर। ऐसे में हमारी समस्याओं के समाधान का भी कोई न कोई पुख्ता इंतजाम किया जाना चाहिए।
-अरविंदर कौर, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच-32
तनाव प्रबंधन की हो व्यवस्था
हमारे तनाव का स्तर एक सामान्य व्यक्ति के स्तर से काफी ज्यादा होता है। घर से काम कर अस्पताल में ड्यूटी पर लग जाना होता है। हमारे तनाव प्रबंधन के लिए कार्यस्थल पर उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
-सोनाली सुर्या, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच-32
उत्साहवर्द्धन बेहद जरूरी
कोविड के दौरान अपनी परवाह किए बिना हमने दिन-रात मरीजों की देखभाल की। मेरा मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में हमारा उत्साहवर्धन भी किया जाना चाहिए ताकि हम और उत्साहित होकर काम कर सके।
-जतिंदर कौर, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच-32
हमारा वीकेंड तो आता ही नहीं
अस्पतालों में मरीजों का दबाव इतना ज्यादा है कि हमें छुट्टी लेने के बारे में सोचने का भी मौका नहीं मिलता। इस स्थिति से उबरने के लिए मरीजों के अनुपात में मानव संसाधन की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।
-रागिनी अरोड़ा, नर्सिंग ऑफिसर जीएमसीएच-32