चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट की पहली बैठक में शासन सुधार से लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए जा सकते हैं। यह प्रस्ताव आसानी से पास होने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जाता है कि गोयल ग्रुप के लोगों की अधिसूचना जारी होने में अभी समय लगेगा। ऐसे में बैठक में कोई सवाल खड़े भी नहीं हो पाएंगे। नए डीएसडब्ल्यू की तैनाती, वार्डनों के कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव, अधिकारिक पदों पर नए शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षकों की पदोन्नति के आगे की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
पीयू शासन सुधार के लिए चांसलर कार्यालय की ओर से उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। उन्होंने अपनी सिफारिशें चांसलर को भेज दी हैं। अब यह सिफारिशें लागू करने का काम सीनेट का ही है। सूत्रों का कहना है कि पहली बैठक में यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाया जा सकता है, क्योंकि पीयू के अधिकारियों और कुछ महत्वपूर्ण लोगों का इसी पर जोर है। ऐसे में बिना विवाद के यह प्रस्ताव पास करवाना भी एक चुनौती है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि प्रस्ताव पास हो जाएगा। नए डीएसडब्ल्यू की तैनाती को लेकर पहले सीनेट में विवाद हुए हैं। मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा है। ऐसे में सीनेट में दबदबा कायम करने वाला एक खेमा चाहता है कि इस प्रस्ताव पर भी नाम तय कर अंतिम रूप दिया जाए। शिक्षकों की पदोन्नति बड़ी संख्या में हुई, लेकिन उनको अन्य लाभ पूरे नहीं मिल पाए। उन्हें सीनेट ही मंजूरी देगी। यह मुद्दा भी पास करवाने की तैयारी की जा रही है। विभागों के डीन बनाए जाएंगे या नहीं। विभागों के डीन वाले कार्य कैसे होंगे, इस पर निर्णय हो सकता है। अंतिम बजट को मंजूरी देने से लेकर लंबित प्रस्तावों को भी रखा जा सकता है।
रोस्टर का प्रस्ताव भी हो सकता है पास
इसी के साथ इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग से करने का प्रस्ताव भी आ सकता है। रोस्टर का प्रस्ताव वर्षों से लटका हुआ है। कमेटी ने इसे मंजूरी दे दी है। अब सीनेट में यह पास हो सकता है। हालांकि इसको लेकर कुछ लोगों की आपत्तियां भी आ सकती हैं जबकि यूजीसी, एससी आयोग का पीयू पर दबाव है कि रोस्टर जल्द से जल्द लागू हो। पीयू के छात्रों की सुविधाएं बढ़ाने, कोरोना काल में हुई हानि की पूर्ति आदि के लिए भी नए प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। वहीं दूसरी ओर गोयल ग्रुप ताकत लगा रहा है कि अधिसूचना हुए बिना यह सीनेट की बैठक न हो। बैठक को स्थगित कराने के लिए पूरी ताकत लगाई जा रही है। पुटा भी विरोध में है। इसको लेकर धरना-प्रदर्शन कभी भी शुरू हो सकता है।
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क्या बिना सिंडिकेट के पास हो सकेंगे मुद्दे
पीयू कैलेंडर के मुताबिक पीयू के हर प्रस्ताव पर पहले सिंडिकेट मुहर लगाती है, उसके बार प्रस्ताव सीनेट में जाता है। इस बार 8 जनवरी को सीधे सीनेट की बैठक रख दी गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सिंडिकेट के बिना सीनेट में प्रस्ताव पास हो सकते हैं। कुछ वरिष्ठ शिक्षकों का भी कहना है कि पहले सीनेट का गठन हो और फिर सिंडिकेट बनाई जाए। उसके बाद ही प्रस्ताव लाए जाएं।