पिंजौर स्थित एचएमटी की ट्रैक्टर यूनिट को बंद करने की मंजूरी के बाद पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने आरोप लगाया है कि कंपनी को बंद करने के पीछे करीब 837 एकड़ जमीन को पूंजीपतियों को सौंपकर उन्हें फायदा देना है।
उनका कहना है कि एक तरफ जहां सरकार स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। वहीं एचएमटी कंपनी को बंद कर कर्मचारियों को बेरोजगार किया जा रहा है। भाजपा सरकार पूंजीपतियों की है। उसे आम जनता से मतलब नहीं है।
अंतिम सांस तक लड़ेंगे : महिंद्र
कर्मचारी संघ के प्रधान महिंद्र सिंह का कहना है कि अभी हमारी प्राथमिकता सैलरी लेने की है। जिन कर्मचारियों की कंपनी में सर्विस 30 साल से कम है। उनके लिए कार्मिक संघ खड़ा है।
कार्मिक संघ की मांग है जिनकी कंपनी में अभी सर्विस अधिक बची है, उन्हें अन्य जगह शिफ्ट करने के बजाय हरियाणा सरकार सरकारी विभागों में समायोजित करें। अपने हकों और कंपनी को बचाने के लिए कार्मिक संघ अपनी अंतिम सांस तक लड़ेगा।
भाजपा सरकार का फैसला निंदनीय : बंसल
शिवालिक विकास मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल ने कहा कि एचएमटी को बचाने के लिए राजनीतिक दलों के अलावा दून और रायतन क्षेत्र की जनता और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हाल ही में पैदल मार्च निकाला था। इसके बावजूद बीजेपी सरकार ने एचएमटी कंपनी की ट्रैक्टर यूनिट को बंद कर निंदनीय कार्य किया है।
वीआरएस से किसे फायदा, किसे नुकसान
कर्मचारियों की मानें तो जिनकी सर्विस 30 वर्ष हो चुकी है, उन्हें कंपनी के बंद होने के बाद वीआरएस स्कीम का पूरा फायदा मिलेगा। इसके तहत उन्हें 60 महीने का वेतन मिलेगा।
वहीं जिनकी सर्विस पांच साल से कम बची है उन्हें शेष महीनों का ही फायदा मिलेगा। इस स्कीम का उन्हें इतना फायदा नहीं होगा, जिनकी सर्विस 30 साल से कम है।
जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर यूनिट में फिलहाल करीब 984 कर्मचारी हैं। जिनमें से करीब 700 कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी सर्विस 30 साल से अधिक है। वहीं करीब 284 कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी सर्विस अभी 30 साल से कम है।