हिन्दी माह कहे जाने वाले सितंबर का राजभाषा के साथ अटूट रिश्ता है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि सितंबर माह में हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकारों, कहानीकारों, गायकों और लेखकों के जन्म व मृत्यु इसके गवाह है। शायद इस कारण ही हिंदी और सितंबर में संबंध बना है।
14 सितंबर 1948 को हिंदी को भारतीय संविधान में राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया। उस समय से 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। कुछ विद्वान हिंदी की दुर्दशा से व्यथित होकर इसे हिंदी का श्राद्ध भी कहते हैं।
जब हिंदी और सितंबर के मध्य संबंध खोजने की कोशिश की तो पाया कि सितंबर व राजभाषा हिंदी के बीच काफी गहरा रिश्ता है। कुछ दुखद और कुछ सुखद यादें सितंबर और हिन्दी सेवियों के बीच जुड़ी हुई हैं।
इन हिन्दी साहित्यकारों का सितंबर में हुआ जन्म
ऐसा भी नहीं है कि सितंबर माह ने हमारे हिंदी सेवियों को छीना हो, बल्कि इस सितंबर माह में महापुरुषों का जन्म भी हुआ। खड़ी बोली के प्रेरक भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितंबर 1862 को हुआ। प्रसिद्ध साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को हुआ।
महान हिंदी गायिका व स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को जन्म हुआ। हिंदी फिल्म के महान नायक देवानंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ। इनके अलावा भारतजीवन पत्र के रामकृष्ण वर्मा का जन्म 21 सितंबर 1859 को हुआ। महान दर्शन शास्त्री व साहित्यकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ।
महान साहित्यकार ईश्वर चंद विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को हुआ। महान क्रांतिकारी व साहित्यप्रेमी सरदार भगत सिंह 27 सितंबर 1907 को जन्मे। महान लेखक व सत्यवादी पत्र के इंद्रलाल शास्त्री 21 सितंबर 1897 और हिंदी केसरी के पंडित कामता प्रसाद भी 24 सितंबर 1815 को पैदा हुए।
भ्ये साहित्यकार सितंबर में हुए दुनिया से रुखसत
हिंदी साहित्यकार बालमुकुंद गुप्त का स्वर्गवास 18 सितंबर 1907 को हुआ। हिंदी लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी 7 सितंबर 1968 का निधन हुआ।
प्रसिद्ध कहानीकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी का निधन 11 सितंबर 1922 को हुआ था। इसके अलावा लोकमान्य पत्र के पंडित रमाशंकर त्रिपाठी 26 सितंबर 1964 को पंचतत्व में विलीन हो गए।