मोहाली स्थित गुलमोहर टाउनशिप जमीन ट्रांसफर घोटाले में पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को बड़ी राहत देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है। विजिलेंस ने इस मामले में पांच जनवरी को धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। अब हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उनकी याचिका पर तीन मई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए अरोड़ा ने इस घोटाले में अपनी भूमिका से इन्कार करते हुए हाईकोर्ट से जमानत देने की मांग की थी। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार ने साल 1987 में आनंद लैंप्स लिमिटेड कंपनी को सेल डीड के माध्यम से 25 एकड़ जमीन अलॉट की थी, जो बाद में सिगनीफाई इनोवेशन नामक फर्म में तब्दील हो गई। सिगनीफाई इनोवेशन कंपनी ने पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (पीएसआईडीसी) से एनओसी लेकर इस प्लॉट को गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया था। आरोप के अनुसार याची ने गुलमोहर टाउनशिप के उक्त प्लॉट को कई हिस्सों में बांटने के पत्र को एमडी पीएसआईडीसी को भेज दिया था और पीएसआईडीसी के अधिकारियों ने फाइलों को देखे बिना यहां पर टाउनशिप बसाने की मंजूरी दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है राहत
इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी थी कि वह चाहें तो अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। साथ ही चार सप्ताह तक इस मामले में दर्ज एफआईआर में आगे किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।