केंद्र सरकार ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ रुपये जारी किए थे और ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ रुपये निकलवा चुका था। राशि निकालने के बाद खाते में 55.81 करोड़ बचे थे जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के विद्यार्थियों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया।
अनुसूचित जाति वर्ग के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के करोड़ों के घोटाले मामले में पंजाब सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है यह जानकारी हाईकोर्ट ने तलब कर ली है। चंडीगढ़ के सतबीर सिंह वालिया ने एडवोकेट फेरी सोफत के जरिये जनहित याचिका में हाईकोर्ट को बताया है कि पोस्ट मेट्रिक स्कॉलरशिप के जरिये केंद्र सरकार अनुसचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि के होनहार विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप जारी करती है। यह राशि राज्य सरकार के जरिये जारी की जाती है।
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विद्यार्थियों के लिए आई राशि को जारी करने से जुड़े दस्तावेज न होने का आरोप
केंद्र सरकार ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ रुपये जारी किए थे और ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ रुपये निकलवा चुका था। राशि निकालने के बाद खाते में 55.81 करोड़ बचे थे जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के विद्यार्थियों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया। जो 248.11 करोड़ निकले गए थे, उनमें से ट्रेजरी विभाग को काफी मशक्कत के बाद भी 39 करोड़ रुपये से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले।
मामले की सीबीआई जांच की याचिकाकर्ता ने मांग की
याचिकाकर्ता का कहना है कि चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार दोनों ने ही बिना कोई मामला दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस पूरे मामले में सही जांच नहीं की जा रही, लिहाजा इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की याचिकाकर्ता ने मांग की है।