पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि अस्थायी कर्मचारी के आश्रितों को नीति की गैर मौजूदगी में अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए पात्र नहीं माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने यह फैसला डेली वेज स्पेशल पुलिस अफसर की मृत्यु के बाद उसके बेटे द्वारा अनुकंपा आधार पर नौकरी की मांग को खारिज करते हुए सुनाया है।
याचिका दाखिल करते हुए मृतक की पत्नी पटियाला निवासी सोमा देवी तथा पुत्र हरविंदर कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि अशोक कुमार को 1992 में स्पेशल पुलिस ऑफिसर नियुक्त किया गया था। 2003 में उनकी मौत हो गई थी और तब याची हरविंदर केवल 7 वर्ष का था। जब वह 18 वर्ष का हुआ तो 2015 में उसने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया।
उसका आवेदन सरकार ने 2020 में खारिज कर दिया। याची ने कहा कि सरकार की नीति के तहत उसके पिता की 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी थी और उन्हें नियमित किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। अगर वह जीवित रहते तो वह नियमित हो जाते और तब तो याची अनुकंपा का पात्र होता। याचिका सिंगल बेंच के समक्ष पहुंची, लेकिन याचिका दाखिल करने में देरी व अन्य कारणों से खारिज कर दिया गया।
खंडपीठ ने याची पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका दाखिल करने में देरी को आधार बनाकर इसे खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि देरी में याची की कोई गलती नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि याची के पिता की सेवा नियमित होने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती। क्योंकि उनके पिता की सेवा नियमित करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक अस्थायी कर्मचारी की मौत की स्थिति में आश्रितों के लिए नौकरी से जुड़ी कोई नीति मौजूद नहीं है, तब तक अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए उन्हें पात्र नहीं माना जा सकता।