सतर्कता ब्यूरो को आवाज के नमूने एकत्रित करने की अनुमति के मोहाली सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक आदेश पर आवाज के नमूने जांच के उद्देश्य से एकत्रित करना निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है।
बंगा तहसील में टाइपिस्टों द्वारा अधिकारियों से मिलकर पंजीकरण के नाम पर लोगों से वसूली की विजिलेंस ब्यूरो को शिकायत मिली थी। इसके बाद संबंधित अथॉरिटी से मंजूरी लेकर उनके फोट टैप करने आरंभ कर दिए गए और पर्याप्त सुबूत जुटा लेने के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। अब इस मामले में आरोपियों के आवाज के नमूने लेने के लिए विजिलेंस ब्यूरो ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन किया जिसे मंजूर करते हुए आरोपियों की आवाज के नमूने लेने की अनुमति दे दी गई।
इसको चुनौती देते हुए कमल पाल व अन्य ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज करने की अपील की। याची ने कहा कि सीआरपीसी के अनुसार आवाज के नमूने लेने का आदेश देने का सत्र न्यायालय को अधिकार नहीं है और ऐसा आदेश देना निजता के अधिकार का हनन है।
हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि रितेश सिन्हा मामले में सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि जज आरोपी की अनुमति के बिना भी उसकी आवाज के नमूने लेने का आदेश दे सकता है। आवाज के नमूने भी उंगलियों के निशान की तरह ही होते हैं क्योंकि हर किसी की विशिष्ट आवाज होती है।