Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
विधानसभा सत्र की लाइव कवरेज के दौरान सिर्फ सरकार और उनके नेताओं को दिखाए जाने के आरोप वाली कांग्रेस नेता प्रताप बाजवा की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे अधूरी जानकारी वाला बताते हुए सवाल उठा दिया। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि कवरेज की जिम्मेदारी किसे दी गई है और किस कानून के तहत इसे किया जाता है, इसका जवाब याची के पास मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने याची को सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन दायर कर जानकारी जुटाने की चार सप्ताह की मोहलत देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि लाइव प्रसारण के लिए क्या किसी निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है या कोई और व्यवस्था है। इसके साथ ही इस कवरेज को कौन से नियमों के तहत किया जा रहा है। जब याची के पास इसके खिलाफ कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो हमें आपकी याचिका पर विचार क्यों करना चाहिए? इस सवालों का उचित जवाब नहीं मिला तो हाईकोर्ट ने बाजवा को इनके जवाब आरटीआई से एकत्र करने की सलाह दी।
बाजवा ने याचिका में आरोप लगाया है कि जब सत्ता पक्ष के सदस्य सदन में बोल रहे होते हैं तो कैमरे को फोकस किया जाता है और उन्हें पूरा प्रदर्शित किया जाता है और साथ ही आप नेता पर कैमरा जूम किया जाता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन बोल रहा है। दूसरी ओर जब विपक्षी नेता बोलते हैं तो भाषण का पूरा हिस्सा नहीं दिखाया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि विपक्ष के विधायक और सरकार के विधायक दोनों अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं, इसलिए भेदभाव उनके मतदाताओं के साथ होता है। इस संबंध में एक आवेदन विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। हालांकि कोई समाधान नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले वह यह पता लगाएं कि प्रसारण चलाने वाला प्राधिकारी कौन है और इसके संबंध में विवरण प्रस्तुत करें। याची यह सब जानकारी लेने के लिए आरटीआई का सहारा लें।