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Highcourt: पंजाब विधानसभा की कवरेज में विपक्ष की अनदेखी की याचिका पर सुनवाई स्थगित, हाईकोर्ट ने उठाए कई सवाल

Wed, 22 Nov 2023 11:50 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने प्रताप बाजवा के वकील को सलाह दी कि वह चार सप्ताह के भीतर आरटीआई से इस बारे में सूचना एकत्रित करें और उसके बाद इस मामले में बहस करें। हाईकोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि उनकी याचिका अमान्य बनती है। इस बारे में कोई कानून नहीं है तो हाईकोर्ट में इसे चुनौती कैसे दी जा सकती है।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
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विस्तार
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विधानसभा सत्र की लाइव कवरेज के दौरान सिर्फ सरकार और उनके नेताओं को दिखाए जाने के आरोप वाली कांग्रेस नेता प्रताप बाजवा की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इसे अधूरी जानकारी वाला बताते हुए सवाल उठा दिया। बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि कवरेज की जिम्मेदारी किसे दी गई है और किस कानून के तहत इसे किया जाता है, इसका जवाब याची के पास मौजूद नहीं था। हाईकोर्ट ने याची को सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन दायर कर जानकारी जुटाने की चार सप्ताह की मोहलत देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि लाइव प्रसारण के लिए क्या किसी निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है या कोई और व्यवस्था है। इसके साथ ही इस कवरेज को कौन से नियमों के तहत किया जा रहा है। जब याची के पास इसके खिलाफ कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो हमें आपकी याचिका पर विचार क्यों करना चाहिए? इस सवालों का उचित जवाब नहीं मिला तो हाईकोर्ट ने बाजवा को इनके जवाब आरटीआई से एकत्र करने की सलाह दी।

बाजवा ने याचिका में आरोप लगाया है कि जब सत्ता पक्ष के सदस्य सदन में बोल रहे होते हैं तो कैमरे को फोकस किया जाता है और उन्हें पूरा प्रदर्शित किया जाता है और साथ ही आप नेता पर कैमरा जूम किया जाता है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन बोल रहा है। दूसरी ओर जब विपक्षी नेता बोलते हैं तो भाषण का पूरा हिस्सा नहीं दिखाया जाता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि विपक्ष के विधायक और सरकार के विधायक दोनों अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं, इसलिए भेदभाव उनके मतदाताओं के साथ होता है। इस संबंध में एक आवेदन विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। हालांकि कोई समाधान नहीं किया गया।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि पहले वह यह पता लगाएं कि प्रसारण चलाने वाला प्राधिकारी कौन है और इसके संबंध में विवरण प्रस्तुत करें। याची यह सब जानकारी लेने के लिए आरटीआई का सहारा लें।

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