एक नाबालिग लड़की द्वारा एक लड़के के साथ सहमति संबंध में सुरक्षा की अपील का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका का दायरा बढ़ाकर विस्तृत आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने हरियाणा-पंजाब व चंडीगढ़ को इनकी शिक्षा, कौशल और वित्तीय सहायता का इंतजाम करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी बच्चियों को बालिग होने तक आशियाना या नारी निकेतन जैसे संस्थानों में भेज दिया जाता है लेकिन यह नाकाफी है। इन बच्चियों की बेहतर देखभाल की जरुरत है ताकि घर छोड़ने के बाद इनका जीवन प्रभावित ना हो। हाईकोर्ट ने पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ को इन बच्चियों की बेहतर देखभाल करने का आदेश दिया है।
तीनों राज्यों को प्रत्येक जिले के चाइल्ड केयर होम्स की पहचान करनी होगी ताकि इन बच्चियों को शोषण से बचाकर इन्हें सुरक्षा दी जा सके। प्रयास किया जाए कि इन बच्चियों की शिक्षा प्रभावित न हो और उन्हें अलग से सिलाई, कुकिंग, कंप्यूटर और फैशन डिजाइनिंग जैसी वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाए, ताकि यह भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी हो सके। इसके साथ ही पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ की लीगल सर्विस अथॉरिटी को आदेश दिया है कि वह इन बच्चियों को जरूरत पड़ने पर वित्तीय मदद प्रदान करें।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संबंधित जिला/अधीनस्थ अदालतों को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि जिन नाबालिग लड़कियों को देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है। उन्हें नारी निकेतन/विशेष गृह/निरीक्षण गृह में न भेजा जाए, क्योंकि इन जगहों पर बाल अपराधियों को भेजा जाता है। इन बच्चियों को चाइल्ड केयर होम्स भेजा जाए, जहां बेहतर सुविधाएं हो। इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है।