अनिल नागर ने कहा कि उसकी बर्खास्तगी का आदेश हरियाणा सिविल सेवा के नियमों के बिलकुल विपरीत है। नागर ने कहा कि उसका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। उसे फंसाया जा रहा है।
हरियाणा लोक सेवा आयोग के उप सचिव अनिल नागर ने अपनी बर्खास्तगी के 7 दिसंबर के हरियाणा सरकार के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने नागर को बिना कोई राहत दिए याचिका पर 22 मार्च को सुनवाई करने का निर्णय लिया है। नागर पर एचसीएस और डेंटल सर्जन की नौकरी लगवाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है।
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याचिका में नागर ने बताया कि स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने उसको भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 7 दिसंबर को हरियाणा सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया। याची ने कहा कि उसकी बर्खास्तगी का आदेश हरियाणा सिविल सेवा के नियमों के बिलकुल विपरीत है। नागर ने कहा कि उसका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। उसे फंसाया जा रहा है। उसने कहा कि बर्खास्तगी के आदेश से पहले उसे जांच में शामिल नहीं किया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि याचिका लंबित रहते बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाई जाए। हरियाणा सरकार की ओर से मामले में पक्ष रखने के लिए समय दिए जाने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने मांग को स्वीकार करते हुए नागर को बिना कोई राहत दिए सुनवाई 22 मार्च को तय कर दी है।