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रणजीत सिंह हत्याकांड: राम रहीम समेत पांच को सजा आज, हरियाणा पुलिस अलर्ट पर, पंचकूला में धारा 144 लागू

Tue, 12 Oct 2021 10:15 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कुरुक्षेत्र के रहने वाले रणजीत सिंह की 10 जुलाई 2002 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आठ अक्तूबर को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम समेत पांच को दोषी करार दिया। डेरामुखी गुरमीत राम रहीम रोहतक में दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल और छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा है। 
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कोर्ट परिसर के बाहर तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
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बहुचर्चित रणजीत सिंह हत्याकांड मामले में सीबीआई की विशेष अदालत डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह समेत पांच दोषियों को मंगलवार को सजा सुनाएगी। फैसले को लेकर हरियाणा पुलिस अलर्ट है। खासकर पंचकूला, सिरसा, रोहतक और कुरुक्षेत्र जिलों में सुरक्षा कड़ी की गई है। पूरे प्रदेश में खुफिया तंत्र भी सक्रिय है।  पंचकूला पुलिस उपायुक्त मोहित हंडा ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है।  

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पुलिस और प्रशासनिक स्तर के आला अधिकारी भी इस पर नजर बनाए हुए हैं। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिला कप्तानों को स्थिति पर नजर रखने समेत सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सोमवार को प्रदेश का खुफिया विभाग दिनभर इसको लेकर इनपुट जुटाता रहा है। खुफिया तंत्र से मिली जानकारी के अनुसार ही सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।  

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                                                 पंचकूला में सुरक्षा के कड़े इंतजाम।

डेरा सच्चा सौदा सिरसा के आसपास दो कंपनियां तैनात की गई हैं। इसी प्रकार रणजीत सिंह के घर को सुरक्षा घेरे में लिया गया है। सुनारियां जेल जहां पर डेरा प्रमुख बंद है, उस एरिया के आसपास भी सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इसी प्रकार पंचकूला अदालत परिसर के आसपास समेत जज के घर की भी सुरक्षा बढ़ाई है। पुलिस का दावा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने को पुख्ता प्रबंध हैं।

यह था रणजीत सिंह हत्याकांड
10 जुलाई 2002 को डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। क्योंकि डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत सिंह ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से ही लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। 
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हाईकोर्ट ने बेटे के पक्ष में फैसला सुनाकर केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी। मामले की जांच करते हुए सीबीआई ने राम रहीम समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। 2007 में कोर्ट ने आरोपियों पर चार्ज फ्रेम किए थे। हालांकि, शुरूआत में इस मामले में डेरामुखी का नाम नहीं था लेकिन 2003 में जांच सीबीआई को सौंपने के बाद 2006 में राम रहीम के ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान के आधार पर डेरा प्रमुख का नाम इस हत्याकांड में शामिल हुआ था। 

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