हरियाणा सरकार जेबीटी, भाषा अध्यापकों व मास्टर वर्ग की रेशनलाइजेशन करने जा रही है। रेशनलाइजेशन के लिए बनाए गए नियमों अनुसार शिक्षकों के पदों का वर्गीकरण हुआ तो हजारों पद खत्म हो जाएंगे। रेशनलाइजेशन में नई शिक्षा नीति को भी ताक पर रख दिया गया है। जेबीटी का शिक्षक-छात्र अनुपात 1:25 है, तो रेशनलाइजेशन में इसे 1:30 तय किया गया है। जबकि, बीते तीन साल से 1:25 के नियमानुसार ही रेशनलाइजेशन हो रहा था। इससे अनेक पद खत्म होंगे।
सरकार ने मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों को सप्ताह में 36 पीरियड का वर्कलोड दिया है, इससे भी शिक्षकों के पद खत्म होंगे। हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन व प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने रेशनलाइजेशन के मानदंडों पर आपत्ति जताई है। शिक्षा के मौलिक अधिकार के अनुसार दूसरा सेक्शन 36 छात्र विद्यालय में होने पर बनाया जाना है। लेकिन पहला सेक्शन 41 बच्चे होने पर बनाया जा रहा है जिससे लगभग 2000 अध्यापकों के पद कम हो जाएंगे।
शिक्षा के मौलिक अधिकार में मौलिक स्कूल मुख्याध्यापक का पद फुल टाइम है, लेकिन इनके लिए भी 36 पीरियड प्रति सप्ताह निर्धारित किए गए हैं । जिससे टीजीटी और भाषा शिक्षकों के 5500 पद कम हो जाएंगे। बीते वर्ष 8 अगस्त 2019 के पत्र के अनुसार मौलिक स्कूल मुख्याध्यापकों की प्रशासनिक जिम्मेदारी को देखते हुए अधिकतम 24 पीरियड प्रति सप्ताह निर्धारित किए थे।
हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन के राज्य प्रधान रमेश मलिक ने कहा कि वे जल्दी स्थानांतरण के पक्ष में हैं। रेशनलाइजेशन के बारे में सभी जिला कार्यकारिणी और पदाधिकारियों तथा एसोसिएशन के सदस्यों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। समुचित और सर्वमान्य मांग सरकार के सामने रखेंगे।