टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) के पद भी बड़ी संख्या में खाली नहीं है। जो पद खाली हैं, उन पर बड़ी भर्ती फिलहाल नहीं होने वाली है। अगर सरकार भर्ती निकालती है तो सीटेट पास हजारों युवाओं के उसमें शामिल होने से प्रदेश के पात्र शिक्षकों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जिससे प्रदेश के अधिक युवा नौकरी पाने से वंचित रहे सकते हैं।
अभी तक केंद्रीय नियुक्तियों में ही लागू सीटेट
हरियाणा में 2008 में एसटेट लागू हुआ। उसी की तर्ज पर एनसीईआरटी ने पूरे देश के लिए इसकी सिफारिश की। हर राज्य ने अपने स्तर पर एचटेट-एसटेट परीक्षाएं लेना शुरू कर दीं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने अधीन संचालित स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए सीटेट लागू किया। इसके आधार पर केंद्रीय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों, नवोदय विद्यालयों इत्यादि में शिक्षक नियुक्त किए जाते हैं। इसकी परीक्षा का पैटर्न एचटेट-एसटेट से बिल्कुल भिन्न है।
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केंद्रीय नियुक्तियों में एचटेट को भी मिले मान्यता: वत्स
हरियाणा पात्र अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा वत्स ने कहा कि ताजा फैसले से प्रदेश के हजारों एचटेट-एसटेट पास युवा सड़कों पर आने को मजबूर होंगे। चूंकि, 7-8 साल से ये परीक्षा पास करते आ रहे युवाओं को अब तक जेबीटी, टीजीटी पदों पर नियुक्ति नहीं मिली है। सीटेट को प्रदेश में मान्यता देने से बेरोजगार पात्र युवा पिछड़ जाएंगे। हरियाणा सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में होने वाली केंद्रीय नियुक्तियों में एचटेट-एसटेट को मान्यता दिलानी चाहिए। 2009 से 2020 तक उन्होंने पात्र अध्यापकों की लड़ाई प्रदेश में लगातार लड़ी है।