कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि गत वर्ष मेक्सिको मुख्यालय बेस द इंटरनेशनल मेज़ एंड व्हीट इंप्रूवमेंट सेंटर (सीआईएमएमवाईटी) की टीम ने गांव में दौरा किया था। यह संस्थान मक्का और धान की सुधरी हुई वैज्ञानिक खेती को प्रमोट करती है। डॉक्टर नागपाल ने बताया कि ये किसान अपने स्तर पर ही 10 साल से धान की पराली को विभिन्न उपकरणों के माध्यम से खेतों में ही समा रहे हैं।
जिससे इनके खेतों का न केवल उपजाऊपन बढ़ा, बल्कि धान के बाद अगली गेहूं व अन्य फसलों का उत्पादन अपेक्षाकृत पहले से अधिक हो गया। इसी के चलते इस इंटरनेशनल संस्थान ने अब इन किसानों डायरेक्ट सीडिंग राइस मशीन (डीएसआर) तोहफे के रूप में प्रदान की है। नागपाल ने बताया कि किसानों के विभिन्न दल दूर-दूर से इनके खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन को देखने आते हैं।
हाईकोर्ट की टिप्पणी- इंटरस्टेट शराब तस्करी का इतना बड़ा मामला है, कैसे दे दें अग्रिम जमानत
अब किसानों को बांट रहे अपना अनुभव
प्रेरक किसानों की ये टोली अब हरियाणा के विभिन्न जिलों के किसानों से अपना अनुभव बांट रहे हैं। उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि किसानों के विभिन्न दल दूर-दूर से इनके खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन को देखने आते हैं। जबकि हरियाणा कृषि विभाग के लिए ' फ्लैग बेयरर ' बन चुके ये किसान विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों, किसान मेलों व कृषि सम्मेलनों में अपने इस अनुभव के आधार पर लेक्चर देकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक भी करते हैं।