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बुजुर्गों की मानी, 10 साल से नहीं जलाए फसल के अवशेष, दुनिया भर में छाए हरियाणा के किसान

Fri, 29 May 2020 10:53 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • द इंटरनेशनल मेज़ एंड व्हीट इंप्रूवमेंट सेंटर ने किसानों के प्रयासों को सराहा
  • दुनिया में मिसाल बना सपहेड़ा गांव का फसल अवशेष मैनेजमेंट मॉडल
  • किसानों के दल देखने आते हैं इनकी मैनेजमेंट, अब लेक्चर भी देते हैं ये प्रेरक किसान
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फसल अवशेष मैनेजमेंट मॉडल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में धान व गेहूं की खेती के बाद फसल अवशेष को खेतों में ही जला देना एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सूबे में करीब 40 किसानों की ऐसी टोली भी है। जिन्होंने अपनी फसल अवशेष मैनेजमेंट के बूते दुनिया के कई देशों में पहचान बनाई है। कृषि विभाग के लिए भी ये किसान आज फ्लैग बेयरर बने हुए हैं। गत वर्ष गन्नौर में आयोजित कृषि सम्मेलन में राष्ट्रपति की मौजूदगी में सीएम से सम्मान पा चुके अंबाला के गांव सपहेड़ा के ये किसान 10 साल से ऑन रिकॉर्ड फसलों के अवशेषों को खेतों में जलाते नहीं है।
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प्रयासों का नतीजा यह है कि आज कई अन्य गांव खुड्डा कलां, कपूरी, मुनरहेड़ी, रतनहेड़ी, शहजादपुर, केसरी, बीहटा में भी किसानों ने सैकड़ों एकड़ खेतों में फसल अवशेषों को जलाना बंद कर दिया है। अभियान को लीड कर रहे किसान सुखमिंदर सिंह सपहेड़ा कहते हैं कि गत वर्ष तक गांव के करीब 600 एकड़ खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाए जाते थे। मगर इस साल 1000 एकड़ एरिया को इस अभियान का हिस्सा बनाने का टारगेट रखा गया है।
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मिट्टी की सेहत ठीक रहे और उर्वकता बढ़े ऐसा गांव के बुजुर्गों के कहने पर गांव के प्रगतिशील किसानों ने 10 साल पहले अभियान को शुरू किया था। किसान घोला सिंह, विनोद चौहान खुड्डा, निर्मल सिंह कपूरी, हरविंदर सपहेड़ा, राम सिंह सपहेड़ा, तलविंदर सिंह सपहेड़ा, गोपाल चौहान खुड्डा, सुरजीत सिंह खुड्डा किसानों ने बताया कि यह अभियान आर्थिक और जमीन के लिए उपजाऊपन के लिहाज़ से फायदेमंद बन रहा है।
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इस तरह दुनिया में छा गया यह मॉडल

कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि गत वर्ष मेक्सिको मुख्यालय बेस द इंटरनेशनल मेज़ एंड व्हीट इंप्रूवमेंट सेंटर (सीआईएमएमवाईटी) की टीम ने गांव में दौरा किया था। यह संस्थान मक्का और धान की सुधरी हुई वैज्ञानिक खेती को प्रमोट करती है। डॉक्टर नागपाल ने बताया कि ये किसान अपने स्तर पर ही 10 साल से धान की पराली को विभिन्न उपकरणों के माध्यम से खेतों में ही समा रहे हैं।

जिससे इनके खेतों का न केवल उपजाऊपन बढ़ा, बल्कि धान के बाद अगली गेहूं व अन्य फसलों का उत्पादन अपेक्षाकृत पहले से अधिक हो गया। इसी के चलते इस इंटरनेशनल संस्थान ने अब इन किसानों डायरेक्ट सीडिंग राइस मशीन (डीएसआर) तोहफे के रूप में प्रदान की है। नागपाल ने बताया कि किसानों के विभिन्न दल दूर-दूर से इनके खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन को देखने आते हैं।  

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अब किसानों को बांट रहे अपना अनुभव
प्रेरक किसानों की ये टोली अब हरियाणा के विभिन्न जिलों के किसानों से अपना अनुभव बांट रहे हैं। उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल ने बताया कि किसानों के विभिन्न दल दूर-दूर से इनके खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन को देखने आते हैं। जबकि हरियाणा कृषि विभाग के लिए  ' फ्लैग बेयरर ' बन चुके ये किसान विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों, किसान मेलों व कृषि सम्मेलनों में अपने इस अनुभव के आधार पर लेक्चर देकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक भी करते हैं।
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