उकलाना व नरवाना में भी पहले भी जजपा के ही विधायक थे। उकलाना में अनूप धानक दोबारा जीते हैं, वह इनेलो छोड़कर जजपा में शामिल हो गए थे। नरवाना से पिरथी सिंह नंबरदार जजपा विधायक थे, उन्होंने भी इनेलो छोड़कर जजपा का दामन थामा था। पार्टी ने उन्होंने टिकट नहीं दी थी। चुनाव में उन्होंने अभी जीते रामनिवास का पूरा साथ दिया।
नैना चौटाला पिछली बार डबवाली से जीती थीं, लेकिन इस बार वह सीट बदलकर बाढ़डा से लड़ीं। दादरी सीट जजपा से खिसकी है। यहां के पूर्व विधायक राजदीप फौगाट भी इनेलो छोड़ जजपा में आ गए थे। लेकिन उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दी थी।
ये जीते दस विधायक
| दुष्यंत चौटाला |
उचाना कलां |
| नैना चौटाला |
बाढ़डा |
| जोगी सिहाग |
बरवाला |
| ईश्वर सिंह |
गूहला |
| अमरजीत ढांडा |
जुलाना |
| रामकुमार गौतम |
नारनौंद |
| रामनिवास |
नरवाना |
| रामकरण काला |
शाहबाद |
| देवेंद्र बबली |
टोहाना |
| अनूप धानक |
उकलाना |
अक्टूबर 2018 में टूटा चौटाला परिवार व इनेलो
ताऊ की विरासत को आगे बढ़ा रहे ओपी चौटाला परिवार व इनेलो पार्टी में फूट 7 अक्टूबर 2018 को सोनीपत की गोहाना रैली में पड़ी। ओपी चौटाला पैरोल पर आए हुए थे और रैली में मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में भीड़ के एक हिस्से ने इनेलो नेता अभय चौटाला के खिलाफ और दुष्यंत के समर्थन में नारेबाजी कर दी थी।
इसके बाद दुष्यंत और उनके भाई दिग्विजय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद अजय चौटाला पैरोल पर जेल से बाहर आए और उन्होंने पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुला ली, जिस पर उन्हें भी इनेलो से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद दुष्यंत ने नई पार्टी के गठन की घोषणा कर दी।
दुष्यंत चौटाला ने 9 दिसंबर 2018 को जननायक जनता पार्टी का गठन किया। उन्होंने पार्टी को ताऊ देवीलाल की नीतियों के आधार पर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और जींद उपचुनाव अमान्यता प्राप्त दल के तौर पर चप्पल चुनाव चिन्ह के बैनर तले लड़ा। दिग्विजय चौटाला इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे।
इसके बाद जजपा ने लोकसभा चुनाव आप के साथ मिलकर लड़ा। दोनों दलों को मनमाफिक सफलता नहीं मिल पाई, इसके बाद गठबंधन भी टूट गया। जजपा का बसपा से गठबंधन हुआ, लेकिन ज्यादा दिन नहीं चल पाया। पार्टी ने अकेले ही विधानसभा चुनाव में उतरने का निर्णय लिया जो खरा उतरा।
युवाओं में दुष्यंत की अच्छी पकड़
दुष्यंत चौटाला युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। इनेलो और चौटाला परिवार के एकजुट होने के समय दोनों भाई पार्टी के युवा विंग और इनसो का काम देखते थे। इनसो के जरिए दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला ने युवा वर्ग में अच्छी पैठ बनाई। कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव शुरू कराने के लिए किए लंबे आंदोलन से भी युवाओं में पकड़ मजबूत कर ली।
दुष्यंत युवा इनेलो के चलते युवाओं की पहली पसंद बने। जजपा के गठन के बाद भी दोनों भाइयों ने युवाओं से अपना नाता तोड़ा नहीं, बल्कि और प्रगाढ़ किया। इनसो को अजय चौटाला ने स्थापित किया है, इसलिए उसकी कमान आज भी दिग्विजय के हाथ में ही है। युवाओं के दम पर जजपा ने चुनावी रैलियों व जनसभाओं में अच्छी भीड़ जुटाई।
संगठन खड़ा कर किया पार्टी को मजबूत
बीते वर्ष अक्टूबर में चौटाला परिवार और इनेलो में दरार आ गई थी। उसके बाद दुष्यंत चौटाला पीछे नहीं हटे। उन्होंने दिसंबर में पार्टी की स्थापना की और आगे की तरफ कदम बढ़ा दिए। उन्होंने पार्टी की मुख्य इकाई के साथ ही हर वर्ग और प्रकोष्ठ में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की। नए पदाधिकारियों से संपर्क कायम किया और फील्ड में जुट जाने का जोश भरते रहे। उसके आधार ही पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है।