कविता जैन के सामने कांग्रेस ने चंद समय पहले ही पार्टी में शामिल हुए सुरेंद्र पंवार को मैदान में उतारा था, जिन्होंने हर वर्ग के पास जाकर वोटरों को साध लिया और इसका ही परिणाम है कि उनको जीत मिली।
कविता जैन की हार के कारण
- शहरी स्थानीय निकाय मंत्री होने के बावजूद कविता जैन लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकीं।
- चंडीगढ़ ज्यादा समय रहने के कारण क्षेत्र के लोगों के बीच नहीं रहना।
- शहर में हुए विकास कार्यों में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगना।
सुरेंद्र पंवार की जीत के कारण
- जनता के बीच लगातार बने रहने के साथ ही मिलनसार स्वभाव।
- पिछले पांच साल से लगातार समाजसेवा में लगे होने के साथ ही सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- कविता जैन से नाराज वोट बैंक को साधना।
कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले सुरेंद्र पंवार वर्ष 2014 में इनेलो के टिकट पर चुनाव लड़कर तीसरे नंबर पर रहे थे, लेकिन सुरेंद्र पंवार हारने के बावजूद जनता से दूर नहीं हुए और वह लगातार पांच साल से जनता के बीच रहकर हर घर तक पहुंचे। इसके साथ ही पानी की समस्या को दूर करने के लिए हर घर तक टैंकर भेजकर इस किल्लत को दूर कराया। इसके अलावा अन्य मूलभूत सुविधाएं भी अपने खर्च पर उपलब्ध कराईं।
जनता को विकास पसंद नहीं : कविता जैन
जनता ने जैसा भी फैसला लिया है वह मुझे मंजूर है। हमने क्षेत्र में सबसे ज्यादा विकास कार्य कराए हैं और किसी भी जगह कोई समस्या नहीं छोड़ी, लेकिन जिस तरह से जनता ने वोट किया है। उससे लग रहा है कि जनता को विकास कराने वाले लोग पसंद नहीं हैं, लेकिन मैं हमेशा जनता के साथ खड़ी रहूंगी।
घमंड और भ्रष्टाचार को जनता ने हराया : सुरेंद्र पंवार
सोनीपत के नवनिर्वाचित विधायक सुरेंद्र पंवार ने कहा कि जनता ने घमंड और भ्रष्टाचार को हराने का फैसला किया था और जनता ने खुद ही चुनाव लड़कर मुझे जीत दिलाई है। उन्होंने कहा कि सोनीपत में पिछले पांच सालों में जहां भ्रष्टाचार चरम पर रहा, वहीं जनता ने जिसको पहले वोट दिया था वह घमंड में आकर जनता से बात तक नहीं करती थीं। अब शहर की सभी समस्याओं को दूर किया जाएगा और हर किसी को सम्मान दिया जाएगा।