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Haryana Election: सियासी दिग्गजों ने संभाल रखी बेटे-बेटियों की चुनावी बागडोर... संतानों के लिए बहा रहे पसीना

Fri, 27 Sep 2024 01:48 PM IST
शाहरुख खान सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सियासी दिग्गजों ने बेटे-बेटियों की चुनावी बागडोर संभाल रखी है। आधा दर्जन से अधिक हरियाणा के सियासी परिवारों की अगली पीढ़ी चुनाव मैदान में है। विरासत सौंपने के लिए दिग्गज संतानों के लिए पसीना बहा रहे हैं।
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Haryana Election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा के आधा दर्जन से अधिक सियासी दिग्गजों ने चुनावी मैदान में उतरे अपने बेटे और बेटियों के लिए चुनाव की बागडोर संभाली हुई है। नए चेहरे होने के नाते अगली पीढ़ी का नाम केवल मोहरों के तौर पर है, जबकि पूरा चुनाव खुद उनके माता और पिता संभाल रहे हैं। 
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कार्यक्रम तय करने से लेकर प्रचार और प्रहार की रणनीति भी बड़े दिग्गज ही कर रहे हैं। हरियाणा के ये सियासी परिवार अपनी अगली पीढ़ी को राजनीतिक विरासत सौंपने के लिए ताकत झोंके हुए हैं। देखना यह है कि 5 अक्तूबर को प्रदेश की जनता किन नए चेहरों की सियासी जमीन तैयार करती है या फिर सियासी जमीन छीन लेती है।

दुष्यंत चौटाला का प्रचार संभाल रहीं मां नैना चौटाला
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला दोबारा से उचाना कलां सीट से मैदान में हैं। उनके ऊपर प्रदेशभर में पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार का भी जिम्मा है। इसलिए दुष्यंत के प्रचार की कमान उनकी मां नैना चौटाला संभाल रही हैं। वह एक-एक करके गांवों को नाप रही हैं, खासकर महिलाओं को साधने की कोशिश कर रही हैं। दुष्यंत का चुनाव का पूरा प्रबंधन मां नैना के हाथों में है। वहीं, उनके पिता डाॅ. अजय सिंह चौटाला भी बीच-बीच में उचाना का दौरा कर रहे हैं।
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बृजेंद्र सिंह के लिए बीरेंद्र सिंह बहा रहे पसीना
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का एलान कर चुके हैं, लेकिन अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे को सौंपने के लिए जोर लगा रहे हैं। बृजेंद्र सिंह इस बार उचाना से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। चौधरी बीरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रेमलता दोनों बृजेंद्र सिंह के लिए पसीना बहा रहे हैं। बीरेंद्र सिंह नाराज मतदाताओं को मनाने से लेकर गांव-गांव में जनसभाएं कर रहे हैं। मां प्रेमलता महिलाओं के बीच प्रचार में जुटी हैं।

आदित्य के लिए रणदीप सुरजेवाला ने झोंकी ताकत
कैथल से कांग्रेस के प्रत्याशी आदित्य सुरजेवाला हैं। बेटे को विधानसभा पहुंचाने के लिए राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला पूरी ताकत लगाए हुए हैं। आदित्य सुरजेवाला केवल नाम हैं, जबकि पूरा चुनाव रणदीप सिंह सुरजेवाला संभाल रहे हैं। शहर से लेकर गांव-गांव और गली-गली सुरजेवाला बेटे के लिए वोट की अपील कर रहे हैं। रूठों को मनाने से लेकर बेटे के प्रचार की रणनीति और कार्यक्रम भी खुद तय कर रहे हैं। सुरजेवाला चुनाव में इतने व्यस्त हैं कि मात्र तीन घंटे ही सो पा रहे हैं।

बेटे विकास के लिए जेपी ने संभाली कमान
कांग्रेस सांसद जेपी के बेटे विकास सहारण कलायत से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। हलके के लिए नया चेहरा होने के नाते पूरा चुनाव पहले से यहां से विधायक रह चुके उनके पिता जेपी संभाले हुए हैं। जेपी ही यहां बेटे के लिए स्टार प्रचारक हैं। वही पूरा चुनाव संभाल रहे हैं और विरोधी नेताओं पर भी जेपी ही हमलावर हैं। जेपी बेटे के चुनाव में इतने व्यस्त हैं कि मात्र पांच घंटे ही सो पाते हैं।

चिंरजीव के लिए अजय यादव तो आरती के लिए राव इंद्रजीत ने लगाई ताकत
रेवाड़ी से दोबारा से चिरंजीव राव कांग्रेस पार्टी की ओर से मैदान में हैं। पिता कैप्टन अजय यादव राजनीति के पुराने खिलाडी होने के नाते शहर से लेकर गांवों तक में प्रचार को धार दे रहे हैं। कैप्टन हलके की नब्ज समझते हैं और पुराने कार्यकर्ताओं और टीम को जोड़े हुए हैं। इसी प्रकार, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्र सिंह अपनी बेटी आरती राव के लिए अटेली में पसीना बहा रहे हैं। आरती भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। बेटी को चुनाव जिताने के लिए राव इंद्रजीत ने पूरी ताकत लगा रखी है।

श्रुति के लिए किरण चौधरी तो अनिरुद्ध के लिए रणबीर महेंद्रा ने संभाला मोर्चा
तोशाम में चौधरी बंसीलाल की विरासत संभालने की जंग है। यहां भाजपा से सांसद किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से रणबीर महेंद्रा के बेटे अनिरुद्ध चौधरी प्रत्याशी हैं। श्रुति चौधरी के लिए किरण चौधरी लगातार पुराने वर्करों को साधने में लगी हैं। वहीं अनिरुद्ध के लिए उनके पिता रणबीर महेंद्रा मोर्चा संभाले हुए हैं और जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं।

 
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बेटी चित्रा सरवारा के प्रचार से दूर निर्मल सिंह
अंबाला सिटी से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री निर्मल सिंह पहले ऐसे नेता हैं, जो अपनी बेटी के लिए प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। चित्रा सरवारा की अंबाला कैंट से टिकट कटने के बाद वह निर्दलीय मैदान में हैं। कांग्रेस ने चित्रा को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। दोनों ही चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन निर्मल सिंह बेटी के प्रचार में नहीं जा पा रहे हैं, यहां खुद चित्रा ही मोर्चा संभाले हुए हैं।


 
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