हरियाणा में पहली बार सीधे हो रहे मेयर चुनाव को जीतने के लिए भाजपा सिद्धांतों से समझौते पर उतर आई है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद हरियाणा निगम चुनाव में पार्टी ने जातिवाद का झंडा उठा लिया है। करनाल में भाजपा ने मेयर का चुनाव जीतने के लिए अंतिम समय में पंजाबियत का ढोल जमकर पीटा। मेयर पद की उम्मीदवार रेणु बाला गुप्ता की ओर से बाकायदा विज्ञापन भी दिए गए।
जिससे भाजपा सरकार का हरियाणा एक-हरियाणवी एक का ट्रेडमार्क नारा निगम चुनावों में टांय-टायं फिस्स हो गया। सबका साथ-सबका विकास को छोड़कर भाजपा सीधे-सीधे जातिवाद पर उतर आई। सोशल मीडिया पर जातिवाद का सहारा लेने पर भाजपा की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं। मतदाता और आम आदमी इसकी खूब आलोचना कर रहे हैं। तीन राज्यों में हार के बाद हरियाणा सरकार और भाजपा ने प्रदेश में अपनी जमीन बचाने के लिए पूरी ताकत झोक दी। सीएम सिटी करनाल में ही मेयर का पद विपक्षी दल न जीत ले, इसे देखते हुए भाजपाइयों और सरकार को पसीने आ गए।
भाजपा के लिए नाक का सवाल करनाल की मेयर सीट
नगर निगम चुनाव भाजपा और इनेलो सिंबल पर लड़ रहे हैं। इसलिए मेयर चुनाव को सीधे भाजपा की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा अगर करनाल में ही मेयर चुनाव हार गई तो विपक्ष सीएम पर हमलावर होगा। सरकार विरोधी हवा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। इसे देखते हुए भाजपा ने जहां अंतिम समय में खुलेआम पंजाबियत का सहारा लिया, वहीं सीएम को खुद कमाल संभालनी पड़ी। जनता किसे जनादेश देते हुए मेयर चुनती है, ये 19 दिसंबर को साफ हो जाएगा।
मेयर की ओर से दिया गया विज्ञापन
भाजपा की मेयर पद की प्रत्याशी रेणु बाला गुप्ता को हार के डर से पंजाबियत का सहारा लेने वाला विज्ञापन देना पड़ा। इसमें सबसे ऊपर पीएम नरेंद्र मोदी, उसके बाद बीच में सीएम मनोहर लाल और सबसे नीचे रेणु बाला की फोटो लगी है। विज्ञापन में रेणु ने लिखवाया है कि 52 साल में हरियाणा को पहला पंजाबी मुख्यमंत्री मिला, अगर आज गलती की तो साठ साल में फिर मौका न मिलेगा।