हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा।
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हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि पार्टी किसानों के समर्थन में तीन फरवरी से पांच फरवरी तक प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में शांति मार्च का आयोजन करेगी। उन्होंने बताया कि सरकार की किसान आंदोलन में अपनाई जा रही फूट डालो और राज करो की नीति को देखते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान दिवस पर यह निर्णय लिया गया। शांति, आपसी भाईचारा व सौहार्द कायम रखने के लिए हरियाणा में यह शांति मार्च निकाले जाएंगे।
सैलजा चंडीगढ़ स्थित हरियाणा कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने इससे पहले कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सैलजा ने कहा कि कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ जब से यह आंदोलन शुरू हुआ है, उसी दिन से भाजपा षड्यंत्र रचकर बदनाम करने के कुत्सित प्रयास कर रही है। पिछले 70 दिनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। कहीं भी हिंसा की कोई वारदात नहीं हुई। भाजपा के लोग धरनास्थल पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे किसानों पर हमला कर रहे हैं, पुलिस मूकदर्शक बनी है।
इंटरनेट सेवा सभी इलाकों में तुरंत शुरू की जाए : सुरजेवाला
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने जिलों में इंटरनेट सेवाएं तुरंत शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान आंदोलन को कुचलने के लिए इंटरनेट बंद किया है। जिससे कोरोना महामारी के दौरान घर से काम कर रहे लोग, पढ़ाई कर रहे स्कूल-कॉलेज-विश्वविद्यालयों के छात्र और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले व्यापारी, दुकानदार और आम लोगों को बहुत अधिक परेशानी हो रही है। आज कल विभिन्न परीक्षाएं भी चल रही हैं और ऐसे में परीक्षार्थी बहुत परेशान हैं।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार को उसके गलत फैसलों से आम जनता को होने वाली परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों को यह सरकार कमजोर समझने की भूल न करे, किसान आंदोलन और किसान नेताओं का उत्पीड़न किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरा विपक्ष व देश की सारी जनता का पूरा समर्थन किसानों के साथ है।
भाजपा की शह पर हुई लाल किले की घटना
26 जनवरी को लाल किले पर जो कुछ हुआ, वह भाजपा की शह पर हुआ, अब यह बात पूरा देश जान चुका है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से दो दिन पहले देर रात को किसान नेताओं को गाजीपुर बॉर्डर से बलपूर्वक उठाने का प्रयास किया गया और सिंघु बॉर्डर पर किसानों को उकसाने की कोशिश की गई, वह निंदनीय है।