मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि दिल्ली को पानी देना अकेले हरियाणा की जिम्मेदारी नहीं है। प्रदेश के मुद्दों को पूरी तैयारी के साथ लेकर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में पहुंचे सीएम ने बोर्ड से ओखला पर यमुना के पानी का राज्य का न्यायोचित हिस्सा छोड़ने की मांग रखी। उन्होंने कच्चे पानी की आपूर्ति और नहरी सिस्टम के संचालन व रखरखाव की एवज में दिल्ली की ओर बकाया 150 करोड़ रुपये की शीघ्र अदायगी की बात भी कही।
मुख्यमंत्री ने रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं को भी शीघ्र पूरा करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली को पानी देने से यमुना नदी के हरियाणा के वैध हिस्से में कमी आती है, जिससे प्रदेश के लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सतही और भूमिगत जल संसाधनों के संबंध में पानी की कमी वाला राज्य है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़ने वाले क्षेत्र समेत राज्य के आधे से अधिक क्षेत्रों के लिए यमुना नदी ही सतही जल का एक मुख्य स्रोत है। उन्होंने कहा कि यमुना नदी में पानी की उपलब्धता धीरे-धीरे घट रही है। यह न केवल हरियाणा बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि दिल्ली समेत यह क्षेत्र पानी की प्रमुख जरूरतों के लिए इसी नदी पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि यमुना नदी में पानी के घटते बहाव के बावजूद हरियाणा अपने हिस्से से दिल्ली के पानी की जरूरतों को पूरा करता है और दिल्ली के रावी-ब्यास व यमुना नदी के हिस्से के पानी को अपने नहरी सिस्टम के माध्यम से भेजता है। इस नहरी सिस्टम के संचालन और रखरखाव की लागत बहुत अधिक है।
बोर्ड से कहा, दिल्ली से दिलाए बकाया रकम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि दिल्ली न तो अतिरिक्त कच्चे पानी और न ही संचालन व रखरखाव लागत के लिए शुल्क अदा करता है। दिल्ली को इस समय अतिरिक्त कच्चे पानी के लिए 94 करोड़ रुपये और संचालन और रखरखाव के लिए 56.57 करोड़ रुपये देने हैं। इस तरह से दिल्ली की ओर 150.57 करोड़ रुपये देय हैं। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया कि वह इस दिशा में कदम उठाए और दिल्ली से यह लंबित अदायगी करवाए।
पंजाब समेत उत्तर भारत के अन्य राज्य भी दिल्ली को पानी दें मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि दिल्ली को पेयजल देने की जिम्मेदारी अकेले हरियाणा की नहीं है। पंजाब समेत उत्तर भारत के अन्य राज्य भी इसके लिए आगे आएं और राष्ट्रीय राजधानी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने हिस्से का योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना नदी और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित तीन बांधों रेणुका, किशाऊ और लखवार का निर्माण होने से कुछ हद तक पानी की भारी कमी की समस्या से निपटा जा सकता है।