हरियाणा विधानसभा में मंगलवार को 24 साल बाद हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग विधेयक, 2016 पारित कर दिया गया। इसका उद्देश्य एक स्थायी तंत्र स्थापित कर हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा देने का है। इस मामले में एक अलग कानून बनाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ओर से यह विधेयक पेश किया गया, जिसकी मंत्रणा राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी होगी।
हरियाणा में विभिन्न जातियों के सामाजिक व आर्थिक पिछड़ेपन का समाधान करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 340 के अधीन जस्टिस गुरनाम सिंह (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में 7 सितंबर,1990 को पहला पिछड़ा वर्ग आयोग स्थापित किया गया था। इस आयोग की सिफारिशों पर राज्य सरकार ने 5 फरवरी, 1991 को 10 जातियों अहीर, बिश्नोई, मेव, गुज्जर, जाट, जट-सिख, रोड़, सैनी, त्यागी और राजपूत को पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया और इन जातियों को 5 अप्रैल, 1991 को आरक्षण उपलब्ध करवाया।
दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों पर राज्य सरकार ने 7 जून, 1995 को पांच जातियों- अहीर/यादव, गुज्जर, सैनी, मेव, लोध व लोधा को पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने 8 अप्रैल, 2011 को जस्टिस (सेवानिवृत्त) केसी गुप्ता की अध्यक्षता में हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का पुनर्गठन किया।
इस आयोग ने जो सिफारिशें दी, उनके तहत लागू किए गए आरक्षण को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। उसके बाद, यह सुझाव दिया गया कि राज्य सरकार, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पैटर्न पर हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा दे, जिसकी मंत्रणा राज्य सरकार पर बाध्यकारी होगी। इस मामले को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में भी रखा गया और यह सुझाव दिया गया कि हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा देते हुए इसके गठन के लिए कदम उठाए जाएं।
ऐसा होगा आयोग का ढांचा
हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग में राज्य सरकार की ओर से नामित सदस्य शामिल होंगे। हाईकोर्ट के जस्टिस इसके अध्यक्ष होंगे, जबकि सदस्यों में एक समाज विज्ञानी, दो व्यक्ति पिछड़ा वर्ग से संबंधित मामलों के विशेष जानकार होंगे और राज्य सरकार का सचिव स्तर का कोई अधिकारी आयोग का सदस्य सचिव होगा। प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन कोई भी सदस्य किसी भी समय अपने पद से त्याग पत्र दे सकता है। विशेष मामलों में सदस्य को हटाने का अधिकार राज्य सरकार के पास भी रहेगा। आयोग पिछड़े वर्ग के रूप में नागरिकों के किसी वर्ग को शामिल करने या निकालने के लिए अनुरोधों का परीक्षण करेगा और किसी पिछड़े वर्ग को अधिक शामिल करने या कम शामिल करने की शिकायतों की सुनवाई भी करेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार को सलाह देगा।