हरियाणा कर्ज लेने के मामले में पंजाब से दो कदम आगे निकल गया है। सिर्फ कर्ज लेने में ही नहीं इस बार प्लान बजट पंजाब से ज्यादा है और घाटा भी पंजाब से अधिक हो गया है। 1966 में हरियाणा गठन के बाद से अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने में लगा हरियाणा धीरे-धीरे बैकफुट पर आ रहा है।
हरियाणा विधानसभा में वित्त मंत्री ने कुल 88 हजार 781.96 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट पेश किया है। पिछले साल यह बजट 69 हजार 140 करोड़ रुपये का था। पिछले वर्ष बजट में 9557.52 करोड़ रुपये का घाटा दर्शाया गया था, जबकि इस वर्ष यह घाटा बढ़कर 10 हजार 693.15 करोड़ हो गया है। अगले वित्त वर्ष के बजट तक यह घाटा 12 हजार 280.35 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।
पंजाब विधानसभा में इस बार के बजट में महज 7983 करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया है। पंजाब का कुल प्लान बजट 86 हजार 387 करोड़ है, जोकि हरियाणा से कम है। कर्ज के मामले में भी हरियाणा पंजाब से आगे निकल गया है। पंजाब सरकार की ओर से पेश किए गए बजट में जहां राज्य की तरफ एक लाख 38 हजार करोड़ का कर्ज बताया गया है, वहीं हरियाणा सरकार ने बजट में प्रदेश की तरफ एक लाख 40 हजार 831 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया बताया है।
बिजली कंपनियों का कर्ज बनेगा मुसीबत
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु का दावा है कि इस बजट से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बजट में उज्ज्वल डिसकाम एश्योरेंस योजना (उदय) को इस घाटे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते के तहत बिजली वितरण कंपनियों का 34 हजार करोड़ का ऋण है, जिसमें से 25 हजार करोड़ हरियाणा सरकार उतारेगी। लिहाजा, हरियाणा सरकार को भविष्य में और कर्ज लेना पड़ सकता है।
पांच लाख नए रोजगार की गारंटी
हरियाणा के वित्त मंत्री की ओर से पेश किए गए बजट में हर साल निजी क्षेत्र में पांच लाख नए रोजगार सृजित करने की घोषणा की गई है। सरकार इस संबंध में नीति बना रही है, जिसे उद्योग विभाग के साथ समायोजित करके चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।