अंतिम दिनों में प्रचार को मिली धार
प्रचार के अंतिम दिनों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हरियाणा में ही रहे। राहुल ने ताबड़तोड़ आठ रैलियां व रोड शो, प्रियंका गांधी ने चार रैलियां व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दो बड़ी रैलियां करके कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। वहीं, प्रदेश के नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पूरा हरियाणा नापा। भूपेंद्र सिंह ने रोड शो के साथ 75 रैलियां और सांसद हुड्डा ने 80 विधानसभा हलकों में जनसभा और रैलियां की।
किसान, जवान और पहलवानों के मुद्दों को भी कांग्रेस जमकर भुनाया। साथ ही ओपीएस, बढ़ते अपराध, महंगाई को लेकर कांग्रेस ने जमकर प्रचार किया। साथ ही पोर्टलों और संविधान बचाने के मुद्दे को भी हवा दी गई। इस बीच जातिवाद और दलितों के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को बार-बार घेरा। कांग्रेस ने इसका तोड़ निकालते हुए संविधान बचाने व आरक्षण खत्म किए जाने के मुद्दे को एक बार फिर से हवा दी।
24 नेताओं को पार्टी से निकाला, कई बागी बढ़ा रहे परेशानी
कांग्रेस से कुल 24 नेताओं ने बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा। अनुशासनहीनता के चलते पार्टी ने इन सभी को छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया है। हालांकि, पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी और पूर्व विधायक रणधीर गोलन, राजीव मामू गोंदर को कांग्रेस मनाने में कामयाब रही है। हालांकि, पूर्व सीपीएस शारदा राठौर, चित्रा सरवारा, नरेश ढांडे, सज्जन ढुल, सतबीर भाणा, अनिता ढुल, वीरेंद्र घोघड़िया, दिलबाग संडील, डॉ. कपूर नरवाल, राजकुमार वाल्मीकि, रोहिता रेवड़ी, विजय जैन समेत अन्य नेता पार्टी की परेशानी बढ़ा रहे हैं।
कुमारी सैलजा ने की दर्जनभर सभाएं
कुमारी सैलजा ने भी दर्जनभर जनसभाएं की हैं। हालांकि, वे केवल अपने समर्थकों के लिए ही प्रचार करती दिखीं। सिरसा लोकसभा के साथ साथ उन्होंने अंबाला में पड़ने वाली विधानसभा सीटों पर प्रचार किया।
तीन सांसद व एक पूर्व मंत्री अपने ही क्षेत्रों में उलझे रहे
कांग्रेस हाईकमान की ओर से स्टार प्रचारकों की सूची में 40 दिग्गज नेताओं को शामिल किया गया था। हालांकि, इनमें से कई नेता अपने हलकों से ही बाहर नहीं निकल पाए। ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट जुलाना से बाहर नहीं निकल पाई, वह केवल चरखीदादरी में ही जा पाईं। इसी प्रकार, चौधरी बीरेंद्र सिंह अपने बेटे बृजेंद्र सिंह, रणदीप सुरजेवाला अपने बेटे आदित्य सुरजेवाला के कारण हलके से बाहर नहीं निकल पाए। सांसद जेपी भी अपने बेटे के लिए कलायत में प्रचार करते दिखे, हालांकि, उन्होंने हिसार संसदीय क्षेत्र में हुई रैलियों में जरूर भागीदारी की।