दक्षिणी हरियाणा की अहीरवाल बेल्ट में चौधर का सपना संजोए और पिछड़ा वर्ग के सहारे सत्ता की चाबी का केंद्र बनने को आतुर महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों से ही सियासी समीकरण संधेंगे।
भले ही गृह मंत्री अमित शाह करनाल रैली में कार्यवाहक मुख्यमंत्री नायब सैनी को सरकार बनने के बाद सत्ता की चाबी सौंपने की कह गए हों, लेकिन अहीरवाल बेल्ट के परिणाम के बाद ही इस पर निर्णय हो सकेगा, क्योंकि अटेली से भाजपा प्रत्याशी आरती राव की जीत पर ही चौधर का अहीरवाल बेल्ट में आना टिका है।
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के प्रदेश के सिंहासन पर बैठने की राह आरती राव की जीत से ही प्रशस्त मानी जा रही है। महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले की सात विधानसभा सीट में से छह पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है तो सिर्फ अटेली विधानसभा सीट ऐसी है जहां मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है।
अटेली विधानसभा सीट पर यादव-ब्राह्मण गठबंधन हर किसी की जुबान पर है। राव-राम फैक्टर पर सबकी निगाह है। प्रदेश में भाजपा के पौधे को सींचने वाले प्रो. रामबिलास शर्मा इस समय राव इंद्रजीत सिंह के साथ आरती राव का जोर-शोर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस उम्मीदवार अनीता यादव भी पूरे जोश में टक्कर दे रही हैं। यादव बहुल सीट होने के बावजूद आरती राव और अनीता यादव के अलावा यहां इनेलो-बसपा प्रत्याशी ठाकुर अत्तरलाल जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ डटे हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में अत्तरलाल का निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रदर्शन बेहतर रहा था।
पांच साल से वे विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। जमीनी स्तर पर इनके पक्ष में सियासी माहौल है और ये कड़ी टक्कर देंगे। आप से सुनील राव, जजपा-आसपा से अभिमन्यु राव चुनाव मैदान में हैं। यहां 60 प्रतिशत यादव समाज सहित पिछड़ा वर्ग के मतदाता और 15 प्रतिशत ब्राह्मण सहित सवर्ण मतदाताओं के गठजोड़ में राम-राव जोड़ी लगी हुई है।
महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट पर मुकाबला रोचक होता जा रहा है। यहां से भाजपा के कंवर सिंह यादव और कांग्रेस के रावदान सिंह आमने-सामने हैं। यह रामबिलास शर्मा की पारंपरिक सीट है, लेकिन वो यहां कम और अटेली सीट पर आरती राव का प्रचार ज्यादा कर रहे हैं।
इसके बावजूद दो बार महेंद्रगढ़ जिलाध्यक्ष रहे कंवर सिंह यादव और निवर्तमान विधायक राव दान सिंह मजबूती से एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। राव दान सिंह के नामांकन में आए भूपेंद्र सिंह हुड्डा नामांकन जुलूस में उन्हें सरकार बनने पर बड़ी जिम्मेदारी (डिप्टी सीएम) का एलान कर चुके हैं। अपनी-अपनी रणनीति के आधार पर भाजपा और कांग्रेस इसे अपने लिए सेफ सीट मान रही हैं।
नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र को भी भाजपा अपने ही खाते में मान रही है, लेकिन भाजपा प्रत्याशी डॉ. अभय यादव और कांग्रेस प्रत्याशी मंजू चौधरी में आमने-सामने का मुकाबला होगा। नायब सरकार में डॉ. अभय सिंह यादव सिंचाई मंत्री थे। इसके बावजूद अब भी कई ऐसे गांव हैं, जहां नहरी पानी नहीं पहुंच सका है।
इससे किसानों में नाराजगी है, वहीं जलस्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में भी ढोसी की पहाड़ियों पर रोप-वे को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। भाजपा इस सीट पर हैट्रिक लगाने की आस में है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों में नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को ज्यादा बढ़त नहीं मिली थी। हालांकि, कांग्रेस के लिए भी यहां से जीत इतनी आसान नहीं रहने वाली।
2009 में नांगल चौधरी विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से ही यहां कभी कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका है। इस बार कांग्रेस से मंजू चौधरी टक्कर दे रही हैं। मंजू चौधरी 2019 में जजपा प्रत्याशी रहे चौधरी मूलाराम की पत्नी हैं और अपने ससुर चौधरी फूसाराम की राजनीतिक विरासत से सहारे चुनाव मैदान में हैं।
नारनौल सीट पर मनोहर सरकार में मंत्री रहे भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश यादव भाजपा के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। उनको कांग्रेस प्रत्याशी राव नरेंद्र सिंह सीधी टक्कर दे रहे हैं। मुकाबला दोनों के बीच में रोचक मोड़ पर है। भाजपा इसे सेफ सीट मान रही है।
कोसली छोड़ रेवाड़ी से लड़ रहे लक्ष्मण यादव, चिरंजीव राव भी दे रहे टक्कर
अहीरों का लंदन कहे जाने वाले रेवाड़ी जिले का जबसे लोकतंत्र से साक्षात्कार हुआ है तबसे यहां अहीर प्रत्याशी ही जीते हैं। 2000 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी विजय सोमाणी की किस्मत थोड़ा सा जोर और मार देती तो इस लंदन का इतिहास बदल गया होता।
इस चुनाव में विजय कांग्रेस प्रत्याशी अजय यादव से 4924 वोट से पिछड़ गए थे। यादव बहुल क्षेत्र में निर्दलीय वैश्य प्रत्याशी को मिला यह जनसमर्थन साधारण नहीं था। विजय सोमानी इस बार इनेलो-बसपा से प्रत्याशी हैं।
कोसली विधानसभा क्षेत्र निवर्तमान विधायक लक्ष्मण यादव का पारंपरिक क्षेत्र रहा, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने इस बार उन्हें कांग्रेस के चिरंजीव राव के सामने तुरुप के इक्के के रूप में पेश किया और रेवाड़ी सीट से प्रत्याशी बना दिया। कांटे की टक्कर के बीच यहां जीत का अंतर भी काफी कम होगा।
कोसली सीट पर भाजपा के अनिल डहीना और कांग्रेस के जगदीश यादव के बीच सीधी टक्कर है। लक्ष्मण यादव के रेवाड़ी से मैदान में आने के कारण अनिल डहीना यहां नए चेहरे हैं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व मंत्री जगदीश यादव लगातार मोर्चे पर डटे हैं।
वे यहां भाजपा के विकास न करने और सरकार बनने पर आईएमटी लाने का वादा अपने चुनावी भाषणों में कर रहे हैं। बावल सीट पर भी इस बार चुनाव रोचक होने वाला है। यहां हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य निदेशक कृष्ण कुमार ने पद से इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हो गए।
इसके तीन घंटे बाद ही पार्टी नेतृत्व ने इन्हें प्रत्याशी बना दिया। दो बार के जीते और दो बार के मंत्री रहे बनवारी लाल की टिकट यहां से कट गई। कांग्रेस से डॉ. एमएल रंगा यहां प्रत्याशी हैं। वे 2000 में बनी इनेलो सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे थे।
यहां पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के बीच सीधी टक्कर है। कृष्ण कुमार भले ही अधिकारी रहे, लेकिन क्षेत्र में जनता के बीच नए हैं। इस मुकाबले में जनता मौन है। प्रत्याशी के समर्थन में वोट के मामले में वह चुप्पी नहीं तोड़ रही।