चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में आग की घटना से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस कारण स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की जान जोखिम में है। हैरत की बात यह है कि सिर्फ तीन सरकारी स्कूलों के पास अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र हैं, बाकी सभी 109 स्कूल राम भरोसे हैं।
इसमें शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नतीजों में टॉप करने वाले शहर के स्कूल बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। नियमों के तहत फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के बिना स्कूल को मान्यता नहीं मिल सकती।
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अग्निशमन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शहर के सिर्फ तीन सरकारी स्कूलों को ही अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र मिला है। इसके अलावा शहर के 109 सरकारी स्कूलों के पास अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए दिशा निर्देश के अनुसार मान्यता प्राप्त करने के लिए स्कूल के पास विभाग द्वारा पारित अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र या फायर एनओसी का होना अनिवार्य है। इसके बावजूद चंडीगढ़ के सरकारी स्कूल बिना प्रमाण पत्र के चल रहे हैं।
इन सरकारी स्कूलों के पास प्रमाण पत्र
सेक्टर-35 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल नंबर 1 मनीमाजरा और गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल नंबर 2 मनीमाजरा के पास अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र मौजूद हैं।
केवल निजी स्कूलों पर प्रशासन का जोर
सरकारी स्कूलों के मुकाबले प्रशासन का केवल निजी स्कूलों पर एनओसी को लेकर जोर है। हर साल एनओसी प्राप्त स्कूलों की संख्या में सरकारी स्कूल के मुकाबले निजी स्कूलों की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020 में दमकल विभाग द्वारा कुल 22 स्कूलों को एनओसी दिया, जिसमें सभी निजी स्कूलों के नाम शामिल रहे। एक भी सरकारी स्कूल का नाम शामिल नहीं हुआ। वहीं, 2021 में सात स्कूलों में से मनीमाजरा के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल नंबर 1 और नंबर 2 को अप्रैल और अक्टूबर में एनओसी मिला। वर्ष 2022 में कुल 62 शैक्षणिक संस्थानों ने एनओसी के लिए आवेदन किया, जिसमें 25 निजी स्कूलों को एनओसी मिला और इस साल एक भी सरकारी स्कूल को अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिला। वहीं, 2023 में अब तक पांच स्कूलों को एनओसी मिली है, जिसमें एक सेक्टर-35 का गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल शामिल है।
प्रॉपर्टी टैक्स न भरना भी बना स्कूलों के लिए प्रमाण पत्र लेने में आफत
दमकल विभाग स्कूल भवन की इमारत के अनुसार जरूरी उपकरणों दस्तावेज, प्रवेश और निकास रास्ता आदि पैमानों के आधार पर अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र या फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देती है, जिसकी मान्यता तीन साल तक होती है। दस्तावेजों में विभाग द्वारा भवन के प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद ली जाती है। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि बहुत से सरकारी स्कूलों ने कई सालों से प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा है। एनओसी के लिए आवेदन करने पर प्रधानाचार्यों को पता लगता है कि उन्हें पहले प्रॉपर्टी टैक्स भरना होगा।
सभी स्कूलों में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा के उपकरण लगवाए गए हैं। इसके बावजूद स्कूलों में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो व्यवस्था को और मजबूत कर कमियों को पूरा किया जाएगा।
-हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक
सीबीएसई की ओर से कुछ समय पहले ही अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र को स्कूलों के लिए अनिवार्य किया है। सभी इसके प्रति जागरूक नहीं हैं। इसमें अग्निशमन विभाग का रोल आवेदन करने वाले संस्थानों को नेशनल बिल्डिंग कोड और दिल्ली फायर एंड सेफ्टी एक्ट 1986 के दिशा-निर्देश अनुसार निरीक्षण कर प्रमाण पत्र देना है।
-गुरिंदर सिंह सोढ़ी, चीफ फायर ऑफिसर