पंजाब सरकार के कर्मचारियों ने दिनभर धरना दिया।
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अपनी मांगों के समर्थन में पंजाब के सरकारी कर्मचारियों ने गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित दोनों पंजाब सिविल सचिवालयों में कामकाज ठप रखा। इसके साथ ही कर्मचारी संगठनों ने नौ जुलाई को राज्य में चक्का जाम का एलान भी किया है। गुरुवार को पंजाब सिविल सचिवालय-1 के गेट पर कर्मचारियों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उल्लेखनीय है कि कर्मचारियों ने पिछले महीने 23 से 27 जून तक भी हड़ताल की थी। उसके बाद राज्य सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने के लिए मंत्रियों और आला अफसरों की दो कमेटियों का गठन कर दिया था। इन कमेटियों के समक्ष बीते कई दिनों से विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं द्वारा अपनी प्रेजेंटेशन दी जा रही है लेकिन राज्य सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू कर दिए जाने को लेकर कर्मचारी संगठन सकते में आ गए।
उनका कहना है कि जब सरकार की कमेटियों के साथ बातचीत चल रही है तो वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू क्यों किया गया? सरकार के इस रवैये के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने गुरुवार को दोनों सचिवालयों में कामकाज ठप कर दिया। मुलाजिम संगठनों का कहना है कि गत 18 जून को लागू की गई वेतन आयोग की सिफारिशों से कर्मचारियों के वेतन बढ़ने के बजाय घट जाएंगे जबकि कर्मचारी इस वेतन आयोग की सिफारिशों का बीते 10 साल से इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने गुरुवार को एलान किया कि पंजाब सिविल सचिवालय समेत डीसी दफ्तरों, पटवार दफ्तर और अन्य क्षेत्रीय दफ्तरों में दो दिन तक कामकाज ठप रहेगा। इसके बाद 29 जुलाई को पंजाब के सभी कर्मचारी और पेंशनर्स सामूहिक छुट्टी लेकर राज्यभर में कांग्रेस सरकार के खिलाफ रैलियां करेंगे।
गुरुवार को दोनों सिविल सचिवालयों में आयोजित धरने में पंजाब सिविल सचिवालय आफिसर्स एसोसिएशन, पंजाब सिविल सचिवालय परसोनल स्टाफ एसोसिएशन, पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन, सचिवालय दर्जा-4 एसोसिएशन, वित्त कमिश्नर सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।