सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूटी प्रशासन ने एक सितंबर 2020 को तीन महीने के लिए एक सदस्यीय पुलिस सुधार आयोग का गठन किया था। हालांकि कई बार आयोग को एक्सटेंशन दी गई। आयोग का काम ये बताना है कि पुलिस कार्यप्रणाली से लेकर सभी तरह की जांच में किस तरह के सुधार की आवश्यकता है। आयोग के पहले कमिश्नर के तौर पर रिटायर्ड इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजी) आईपीएस केबी सिंह को तैनात किया गया। उनकी तनख्वाह पुलिस विभाग को आवंटित बजट से करीब एक लाख रुपये दी गई। इसके अलावा ऑफिस, स्टॉफ आदि भी मुहैया कराया गया। आयोग के गठन के बाद केबी सिंह ने शहर के विभिन्न आरडब्ल्यूए व विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ बैठकें कीं और अपनी रिपोर्ट तैयार की।
आयोग की रिपोर्ट के दस प्रमुख बिंदु
- पुलिस को दोस्ताना बर्ताव करना चाहिए
- शहर में पांच नए पुलिस थानों का निर्माण
- थानों में आने वाले पीड़ितों के लिए रिकॉर्ड रूम
- पुलिस को आधुनिक हथियारों की जरूरत
- थानों के बुनियादी ढांचे का विकास
- पुलिस और जनता के बीच बेहतर संबंध
- शहर के प्वाइंट पर कैमरों की जरूरत
- साइबर क्राइम का अलग से थाना बनाना
- पुलिस विभाग में समय-समय पर भर्तियां
- पुलिस टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क का मजबूतीकरण
मैंने अपनी रिपोर्ट पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई बदलाव की बात कही गई है। इससे चंडीगढ़ पुलिस और भी मजबूत होगी। -केबी सिंह, कमिश्नर, पुलिस सुधार आयोग