सरकार के खिलाफ कंप्यूटर शिक्षकों ने गांधीगिरी की। उन्होंने जेल में बंद आंदोलनकारी साथियों की रिहाई की मांग को लेकर शनिवार देर शाम शांतिपूर्ण तरीके से शहर में कैंडल मार्च निकाला। साथ ही उन्होंने कंप्यूटर शिक्षकों की शिक्षा विभाग से संबद्धता की मांग दोहराई। आरोप लगाया है कि आंदोलनकारियों को जेल में बंद करना उनके साथ अत्याचार समान है।
जिला पठानकोट इकाई के प्रधान अमनदीप की अध्यक्षता में भारी संख्या में कंप्यूटर अध्यापकों व उनके परिजन सड़क पर उतरे। पंजाब सरकार द्वारा कंप्यूटर अध्यापकों पर किए जा रहे जुल्म के विरोध में उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से कैंडल मार्च निकाला ।
यूनियन के सदस्यों ने बताया कि कंप्यूटर अध्यापकों द्वारा उन्हें शिक्षा विभाग से जोड़ने की मांग को लेकर शंातिपूर्वक ढंग से 21 सितंबर को डीजीएसई कार्यालय मोहली के समक्ष धरना देकर परमिन्द्र सिंह ने आमरण अनशन शुरू किया गया था, लेकिन 26 सितंबर को पंजाब सरकार ने बल प्रयोग कर अनशनरत 60 अध्यापकों को उठाकर थाने में बैठाया। उसी रात को महिला अध्यापकों का थाने से बाहर निकाल दिया गया। उन्हें कहा गया कि वह जहां मन करता है जाएं। इसके चलते उन्होंने गुरुद्वारे में शरण ली।
तहसील प्रधान अमन ज्योति ने बताया कि यह सरकार के जुल्म की हद है कि 26 सिंतबर को पूरे पंजाब में कंप्यूटर अध्यापकों को स्कूलों व घरों से बिना किसी कसूर के गिरफ्तार किया गया। उनके खिलाफ झूठे पर्चे दर्ज कर जेलों में पहुंचाया गया। 14 लोगों को 8 दिनों से नाभा जेल में रखा गया हैं।
उपप्रधान प्रवीन कुमार ने कहा कि यदि हमारे साथियों को तुरंत छोड़ा नहीं गया और उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे निर्णायक आंदोलन करेंगे। इस अवसर पर चतन सिंह, विमल पराशर, विकास, दिनेश सिंह, ब्रिजराज सुभाष, राकेश सैनी, सतबीर, पवन, नीरज, मोहित तुली, कुलविन्द्र सिंह, रपतिन्द्र सिंह, विनय, विशाल, नरिन्द्र, अमन, गंगा राम, अनु, नैंनसी, बिंदू रेखी, निधि, संगीता, ज्योति उपस्थित थे।