प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चलाई गई स्वच्छता की मुहिम जिले में सिर्फ दिखावा साबित हुई। शहर के बाजारों और गली मोहल्लों में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों को देख ऐसा लगता है मानो अभियान के शुरुआत में सफाई पर जोर देने की शपथ लेने वाले अधिकारी, नेता और विभिन्न संस्थाओं के लोग अब अपना फर्ज भूल गए हैं।
लोगों का कहना है कि शपथ के अनुरूप शहर के सार्वजनिक स्थानों पर सफाई की कवायद को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। स्वच्छता अभियान के तहत जिले में कई स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन कर सफाई पर जोर देने के लिए अधिकारी, नेता और विभिन्न संस्थाओं के लोगों ने शपथ ली थी।
दिखावे के तौर पर सड़कों पर झाड़ूू भी लगाई गई, लेकिन उन स्थानों पर सफाई के लिए कोई पहल नहीं हुई जहां इसकी ज्यादा जरूरत थी। आलम यह है कि शहर में इन दिनों कई गली मोहल्लों और बाजारों के सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार नजर आ रहा है। काबिलेगौर है कि अभियान के तहत सफाई कराने की कसम डीसी सुखविंद्र सिंह व विधायक अश्विनी शर्मा ने भी खाई थी, लेकिन शहर के मुख्य गाड़ी अहाता चौक स्थित शहीदी स्मारक के आसपास की स्थिति देख कहा जा सकता है कि जिले में यह अभियान हवाहवाई साबित हुआ है।
यह स्थिति तब है जब शहर के एक मोहल्ले के कुछ लोगों में डेंगू के लक्षण पाए जा चुके हैं। डा. एमएल अत्री का कहना है कि ऐसी स्थिति में आम लोगों को खुद जागरूक होने की दरकार है। लोग मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए पानी एकत्र न होने दें।