केंद्र सरकार की ओर से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की स्थायी सदस्यता खत्म करने की तैयारी का मुद्दा सियासी रूप लेने लगा है। शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पंजाब के अधिकारों पर केंद्र सरकार की दबंगई के खिलाफ एकजुट होकर मुकाबला करने का आह्वान किया है।
जाखड़ ने अपने ट्विटर हैंडल पर इस मुद्दे को उठाते हुए पंजाब लोक कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह, संयुक्त अकाली दल के प्रधान सुखदेव सिंह ढींडसा, आप के सांसद भगवंत मान, पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, शिअद के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से अपील की है कि अब चुनाव खत्म हो गए हैं। पंजाब के अधिकारों को रौंदने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखाई दे रहे एक अभिमानी और दबंग केंद्र के खिलाफ, आप सभी पंजाब की खातिर एकजुट हो जाएं।
जाखड़ ने बीबीएमबी के अलावा यूटी चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब के अधिकारियों की नियुक्ति को दरकिनार कर केंद्र सरकार की ओर से अपने अधिकारियों को नियुक्त करने का मसला भी ट्विटर के जरिये उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया कि चंडीगढ़ प्रशासन में पहली बार पीसीएस व एचसीएस की जगह तीन दानिक्स अधिकारी (यूटी कॉडर के) तैनात किए गए हैं।
जाखड़ का कहना है कि बीबीएमबी के नियमों में पंजाब को नुकसान पहुंचाने के लिए बदलाव किया गया है। बीते कुछ दिनों के दौरान चिंताजनक घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। पंजाब के लिए बीबीएमबी के तहत चलने वाली कई योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। पंजाब ने चंडीगढ़ पर अपना दावा गंवा दिया है, जो चंडीगढ़ में पंजाब के अधिकारियों की नियुक्ति को दरकिनार करते हुए केंद्र ने अंडमान-निकोबार आदि यूटी काडर के अधिकारियों को तैनात करना शुरू कर दिया है।