पूर्व आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू ।
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1200 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले में सोमवार को पहली बार पूर्व आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू विजिलेंस ब्यूरो के समक्ष पेश हुए। उनसे चार घंटे तक विजिलेंस ब्यूरो ने पूछताछ की। इस दौरान मुख्य रूप से सिंचाई विभाग में उस समय में हुए विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया से जुडे़ सवाल पूछे गए। सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस ने केबीएस सिद्धू को एक प्रोफार्मा भी सौंपा है। इसमें सवालों के जवाब भरकर भेजने को कहा है। हालांकि विजिलेंस के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
पूर्व आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू सोमवार को तय समय में विजिलेंस ऑफिस पहुंचे। इस दौरान सीनियर अधिकारियों ने उनसे सवाल जवाब शुरू किया। जांच का पूरा फोकस टेंडर प्रक्रिया पर रहा। विजिलेंस ने यह जानने की कोशिश की कि सिंचाई विभाग में अगर कोई विकास कार्य होना होता है तो उसमें प्रक्रिया कैसे शुरू होती है। इसमें मंत्री या सीनियर आईएएस अधिकारियों की क्या भूमिका होती है? साथ ही टेंडर अलॉट करते समय किन अधिकारियों का फोकस चीजों पर रहता है।
गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व आईएएस अधिकारी को दो बार विजिलेंस ब्यूरो ने समन भेजा था लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हो सके थे। एक बार वह विदेश में थे। इसके बाद वह भारत पहुंचे। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में शरण ली थी। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत भी दी थी। इसके बाद जब दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया तो उन्होंने विजिलेंस को लिखित ईमेल भेजी थी।
इसमें कहा गया था कि उन्हें सूचना बहुत देरी से दी गई थी। ऐसे में जांच में शामिल नहीं हो सकते हैं। अगर पूछताछ करना है तो उचित समय पर सूचना दें। इसके बाद उन्हें दोबारा समन भेजे गए थे। इस मामले में अब तक पूर्व आईएएस अधिकारी काहन सिंह पन्नू और पूर्व मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों से पूछताछ हो चुकी है। पूर्व आईएएस अधिकारी सर्वेश कौशल अभी विदेश में हैं।