विधानसभा चुनाव में सत्ता पाने से चूके हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दर्द एक बार फिर झलका। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के करीब सात से आठ जिताऊ चेहरे ऐसे थे, जिन्हें किसी कारणवश हाईकमान से टिकट नहीं मिल पाई। इन नेताओं को टिकट मिल जाती तो ये प्रत्याशी जरूर जीतते और आज प्रदेश में तस्वीर कुछ और होती।
उन्होंने कहा कि टिकट वितरण में कुछ कमी रह गई। हुड्डा ने कहा कि संगठन का फैसला लेने में भी हाईकमान ने थोड़ी देर कर दी। संगठन पर फैसला भी जल्द हो जाता, तो भी चुनाव में प्रदेश कांग्रेस का प्रदर्शन और बेहतर होता। खैर, उम्मीद है मार्च तक प्रदेश में ब्लाक और जिला स्तर पर संगठन के पुनर्गठन का पूरा हो जाएगा। जिसके बाद पार्टी को और मजबूती मिलेगी।
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सीएम हुड्डा ने सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दाल में वाकई कुछ काला है, इसलिए सरकार खनन और धान घोटाले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से करवाने से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खनन घोटाले की मांग भी सीबीआई या हाईकोर्ट के जज से करवाने की मांग कर चुकी है। जबकि कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में खनन संबंधी कई अनियमितताओं को उजागर किया है। उसके बावजूद सरकार जांच को तैयार नहीं हो रही है।
गन्ने का रेट, बूढ़ों की पेंशन न बढ़ना उनके साथ अन्याय
हुड्डा ने कहा कि अभी तक सरकार का साझा न्यूनतम कार्यक्रम ही किसी सिरे नहीं चढ़ा है। जिसकी वजह से न तो गठबंधन सरकार के वादे धरातल पर उतर पा रहे हैं और न ही जनता को कोई लाभ मिल पा रहा है। उल्टा जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
उनके कार्यकाल में हर सीजन में गन्ने का रेट बढ़ा और देश में सबसे अधिकतम हुआ। इस बार सरकार ने गन्ने का रेट न बढ़ाकर किसान के साथ अन्याय किया है। यही स्थिति प्रदेश के बुजुर्गों, बेसहारा व विधवा महिलाओं के साथ भी रही, क्योंकि वादा करने के बावजूद सरकार ने अभी तक पेंशन धारकों की पेंशन नहीं बढ़ाई है। उनके अनुसार देश में हिंसा का माहौल किसी मसले को समाधान तक नहीं ले जा सकता। उनके अनुसार लोग हिंसा छोड़कर अपनी बात सही ढंग से उठाएं।