सात दिनों बाद भी नेहरू अस्पताल की जांच नहीं हुई पूरी, यहां चंद मिनटों में हो गई
आग पर काबू पाने के बाद पीजीआई के डीन एकेडमिक प्रोफेसर एसएस पांडा, डीडीए कुमार गौरव, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल और एडवांस हाई सेंटर के प्रमुख डॉ. सुरिंदर पांडव ने प्रेसवार्ता की क्योंकि पीजीआई के डायरेक्टर प्रोफेसर विवेक लाल शहर में मौजूद नहीं थे। प्रो. एसएस पांडा ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण वोल्टेज के बार-बार फ्लक्चुएशन होने से समस्या हो गई, जिससे बेसमेंट में रखे गए यूपीएस की बैटरी में शॉर्ट सर्किट के कारण दुर्घटना हुई। इस पर पांच मिनट में काबू पा लिया गया। उन्होंने इस तरह की अनहोनी पर रोक लगाने के लिए विशेष व्यवस्था जल्द ही किए जाने की भी बात कही। इस दौरान संस्थान में इस बात की भी चर्चा रही कि सात दिन पहले हुए अग्निकांड की जांच करने में असमर्थ डॉ. एसएस पांडा की कमेटी ने चंद मिनट में ही आई सेंटर की घटना की रिपोर्ट सौंप दी। ऐसे में नेहरू अस्पताल में लगे आग के पीछे कई सवाल उठने लगे हैं।
यहां भी बायो मेडिकल डिवीजन ने की थी जांच
प्रोफेसर एसएस पांडा ने बताया कि बेसमेंट में रखे गए यूपीएस सिस्टम की कुछ दिनों पहले ही बायोमेडिकल डिवीजन की टीम ने निरीक्षण कर जांच की थी इसलिए शॉर्ट सर्किट के कारणों की जांच बारीकी से कराई जाएगी। चौंकाने वाली बात यह है कि नेहरू अस्पताल के जिस यूपीएस रूप में हुए शॉर्ट सर्किट से भयानक तबाही मची थी उसकी भी देखरेख की जिम्मेदारी बायोमेडिकल डिवीजन ही संभाल रहा है। ऐसे में इस बात की चर्चा भी हो रही है कि बायोमेडिकल डिवीजन के कर्मचारी ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं जिससे इस तरह की घटनाएं तेजी से हो रही हैं।
नेहरू में सिविल तो आई सेंटर में इलेक्ट्रिक का कार्यालय
नेहरू अस्पताल की तरह पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के बेसमेंट में आग से सुरक्षा के मानकों की अनदेखी सामने आई है। बता दे कि नेहरू अस्पताल के यूपीएस रूम में सिविल के कार्यालय को संचालित किया जा रहा था जिससे शॉर्ट सर्किट के दौरान कार्यालय में रखी सैकड़ों फाइलों से आग तेजी से फैली थी। वही एडवांस सर्विस सेंटर के बेसमेंट में रखे गए यूपीएस सिस्टम के पास इलेक्ट्रिक का मुख्य रिकॉर्ड रूम संचालित किया जा रहा है। जहां खरीद संबंधी रिकाॅर्ड से जुड़ी सैकड़ों फाइल रखी हुई है। इस पर भी फायर सुरक्षा ने कभी आपत्ति नहीं जताई है।