दीवारों, खंबों और सार्वजनिक जगहों पर पोस्टर चिपकाने वालों के खिलाफ नगर निगम अब कानूनी कार्रवाई करने जा रहा है। नगर निगम ने 225 लोगों की एक सूची बनाकर डिप्टी कमिश्नर (डीसी) को भेजी है। डीसी के आदेशों पर अब इन लोगों के खिलाफ डिफेसमेंट एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।
इनमें छात्र नेताओं के भी काफी नाम शामिल हैं। इनके अलावा टू-लेट, कोचिंग इंस्टीट्यूट, ट्यूशंस, टिफिन सर्विस आदि का विज्ञापन दीवारों पर चिपकाने वालों के भी नाम शामिल किए गए हैं। गौरतलब है कि छात्रसंघ चुनावों के दौरान पूरा शहर छात्र नेताओं के पोस्टरों और बैनरों से भर जाता था। अभी भी जगह-जगह छात्र नेताओं के पोस्टर चिपके हुए हैं।
ऐसे होती है कार्रवाई
नगर निगम के इनफोर्समेंट कर्मचारी पोस्टरों की फोटो खींचकर उस पर लिखे मोबाइल नंबर को ट्रेस करने के लिए साइबर सेल को मामला भेज देते हैं। फिर साइबर सेल से कांट्रेक्ट एड्रेस मिलने पर नगर निगम दोषी को नोटिस जारी करता है।
छात्र नेताओं को भेजे लाखों के नोटिस
अभी बीते दिनों नगर निगम ने कई छात्रों को डिफेसमेंट के लिए लाखों रुपये के नोटिस भेजे थे, हालांकि इनकी रिकवरी नहीं हुई, इसलिए अब इनके खिलाफ एफआईआर करवाई जा रही है। इनमें दो छात्र नेता तो ऐसे भी थे जिन्हें 14 लाख का जुर्माना ठोका गया।
जुर्माने के रूप में 6 महीने की विज्ञापन फीस
बिना इजाजत पोस्टर, बैनर और होर्डिंगस लगाने वालों के खिलाफ नगर निगम एडवर्टाइजमेंट कंट्रोल ऑर्डर के तहत कार्रवाई करता है। इन्हें एक साथ 6 महीने (180 दिन) का जुर्माना विज्ञापन फीस के रूप में लगाया जाता है। यदि कोई साबित कर दे कि पोस्टर कब लगाया था तो उसे 6 महीने की बजाय उतने ही दिनों का चार्ज लगता है।