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Punjab Budget: देश में 12वें स्थान पर है पंजाब पुलिस, 10523 करोड़ के फंड से मिलेगी ऑक्सीजन

Sat, 11 Mar 2023 09:25 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब बेशक छोटा राज्य है, लेकिन पाकिस्तान की सीमा से सटा होने के कारण यहां पर अपराध की संख्या काफी अधिक है। हर साल औसतन 700 हत्याएं, 1650 अपहरण व 8 हजार के करीब चोरियां होती हैं।
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पंजाब पुलिस - फोटो : file photo
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विस्तार
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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब पुलिस के लिए बजट में 10523 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है, जो पुलिस आधुनिकीकरण और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। पंजाब की पुलिस देशभर में तीसरे स्थान पर गिनी जाती थी, लेकिन आतंकवाद के खात्मे के बाद पंजाब पुलिस पर अधिक पैसा खर्च नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह निकला कि पंजाब पुलिस भारत में 12वें स्थान पर आ गई है। पंजाब में ड्रग व हथियारों की तस्करी रोकने के लिए पंजाब पुलिस को अधिक से अधिक मजबूत बनाने के लिए फंड की जरूरत महसूस की जा रही थी।
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पंजाब बेशक छोटा राज्य है, लेकिन पाकिस्तान की सीमा से सटा होने के कारण यहां पर अपराध की संख्या काफी अधिक है। हर साल औसतन 700 हत्याएं, 1650 अपहरण व 8 हजार के करीब चोरियां होती हैं। पंजाब में 70 हजार से अधिक हर साल मामले दर्ज होते हैं। कट्टरपंथी पैर पसार रहे हैं और हालात ये हैं कि प्रतिवर्ष 119 आतंकवादी व कट्टरपंथी और 428 गैंगस्टर गिरफ्तार किए गए हैं। पाकिस्तान से हेरोइन की तस्करी की जाती है और 700 किलो हेरोइन हर साल पुलिस बरामद करती है। 

पाकिस्तान सीमा से सटा होने के कारण आईएसआई का सॉफ्ट टारगेट पंजाब रहा है, इसी कारण पिछले एक साल में 43 राइफलें, 220 रिवाल्वर, 13 टिफन इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस, 24.5 किलोग्राम आरडीएक्स और 37 हैंड ग्रेनेड, राकेट लांचर की दो स्लीवज, 22 ड्रोन बरामद किए। पंजाब पुलिस ने गुजरात और महाराष्ट्र की बंदरगाहों से 147.5 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। 
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पंजाब में क्षमता के मुकाबले फोर्स 60 फीसदी भी पूरी नहीं है। एक थाने में जहां 75 मुलाजिमों की जरूरत है, वहां पर महज 30 ही कार्य कर रहे हैं। लिहाजा, सत्तासीन सरकार द्वारा हर साल 1800 कांस्टेबल व 300 सब इंस्पेक्टरों को भरती करने का फैसला लिया गया है। सीमावर्ती इलाकों में पुलिस के आधुनीकिकरण की काफी जरूरत महसूस की जा रही थी।

एक थाने में एक गाड़ी, वह भी एसएचओ के लिए
जमीनी स्तर पर हालात ये हैं कि थानेदार को महज 33 रुपये का पेट्रोल या डीजल रोजाना मिलता है। इसमें आधा लीटर पेट्रोल व डीजल नहीं आ सकता। वहीं सिपाही, हेड कांस्टेबल व हवलदार को औसतन 23 रुपये मिलते हैं। एक थाने में एक गाड़ी है और इसे एसएचओ इस्तेमाल करते हैं। पांच लीटर डीजल थानेदार के इस वाहन को रोजाना मिलता है, जिसमें उसे पूरा दिन चलाना है। इसके लिए बाकायदा लॉग बुक लगी होती है। अनुशासन फोर्स होने के कारण पुलिस मुलाजिम खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन उनका कहना है कि एक मामला दर्ज करने के बाद उसकी जांच के लिए कई बार मौके पर जाना पड़ता है, कई बार अपराधी की धरपकड़ के लिए दूसरे जिले या प्रदेश में जाना पड़ता है तो क्या 23 या 33 रुपये के रोजाना पेट्रोल या डीजल से यह संभव है?

पुलिस के आधुनीकिरण व सुविधाओं पर पैसा खर्च होगा तो फायदा ही होगाः कुलवंत सिंह हीर
रिटायर एसएसपी कुलवंत सिंह हीर का कहना है कि मान सरकार का 10523 करोड़ रुपये पंजाब पुलिस पर खर्च करना एक सराहनीय कदम है। पंजाब पुलिस को मौजूदा चुनौतियों का सामना करने के लिए काफी आधुनिक यंत्रों के अलावा हथियारों व डिवाइस की जरूरत है। साइबर क्राइम में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिसके लिए फंड की जरूरत महसूस की जा रही थी। पंजाब में नशा व हथियारों की समस्या काफी गंभीर है और पंजाब पुलिस इसको खत्म करने में सक्षम है।
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