आईएएस अशोक खेमका और आईएएस संजीव वर्मा।
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हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने के लिए चर्चित आईएएस अशोक खेमका और संजीव वर्मा के बीच की लड़ाई खुलकर सतह पर आ गई है। गुरुवार को डॉ. अशोक खेमका पर नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि 2009-19 में खेमका ने हरियाणा भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक रहते दो प्रबंधकों की नियुक्ति नियमों को ताक पर रखकर की। निगम के वर्तमान प्रबंधक निदेशक संजीव वर्मा ने 12 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए खेमका समेत चार पर आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
खेमका और वर्मा के बीच तनातनी की शुरुआत अभिलेखागार विभाग में रहते हुई। खेमका विभाग के प्रधान सचिव और वर्मा निदेशक पद पर थे। इसी दौरान दोनों विभाग में नियुक्तियों को लेकर आमने-सामने आ गए। मामला मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास पहुंचा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्मा ने नियुक्तियों को जायज ठहराया। यही वजह रही कि कोई कदम सरकार की तरफ से नहीं उठाया गया। इसके बाद दोनों के संबंधों में खटास आ गई, जो अब चरम पर पहुंच गई।
2014-2015 में उठा था अनियमितताओं का मामला
खेमका के भंडारण निगम के कार्यकाल की अनियमितताओं के मामले सबसे पहले 2014-2015 में उठे। पहला मामला निगम के गोदामों की छतों के लिए खरीदी गेल वैल्यूम सीटों और दूसरा नियुक्तियों का था। सीट खरीद का मामला लोकायुक्त हरियाणा के पास भी पहुंचा और केस सीबीआई को सौंपने की मांग की गई। उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सात साल बाद बड़ा कदम भंडारण निगम के वर्तमान प्रबंध निदेशक संजीव वर्मा ने उठा डाला।
अब खेमका भी अभिलेखागार विभाग में हुई नियुक्तियों का मुद्दा दोबारा उठाकर जवाबी हमला बोल सकते हैं। निगाहें सरकार के अगले कदम पर भी टिकी हुई हैं। अब देखना ये है कि खेमका पर पंचकूला पुलिस मामला दर्ज करती है या नहीं, क्योंकि आईएएस अधिकारी पर केस दर्ज करने से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी है।
कई घोटाले उजागर कर चुके हैं खेमका और वर्मा
खेमका हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ भूमि सौदे का इंतकाल रद्द कर सुर्खियों में आए थे। इसके बाद उन्होंने खेल विभाग में गलत इनाम राशि आवंटन, अभिलेखागार विभाग में गलत नियुक्तियों, रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार, अंबाला विज्ञान केंद्र के निर्माण में अनियमितताएं इत्यादि भ्रष्टाचार के अनेक मामले उजागर किए। वहीं संजीव वर्मा अंबाला का मनरेगा घोटाला और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाला उजागर कर चुके हैं। मनरेगा घोटाले में हरियाणा के चार आईएएस अधिकारियों के नाम भी सामने आए थे। छात्रवृत्ति घोटाले में अनेक लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है, इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस के केस दर्ज न करने पर वर्मा ने धरने पर बैठने तक की चेतावनी दे डाली थी। अब उन्होंने भंडारण निगम का मामला खोलकर अफसरशाही में हड़कंप मचा दिया है।
2024 चुनाव के मद्देनजर तो नहीं खेमका की घेराबंदी
सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि खेमका की घेराबंदी 2024 के विधानसभा चुनाव को लेकर तो नहीं है। चूंकि, हाल ही में उन्हें हरियाणा में आप का चेहरा बनाने की चर्चाएं चली थीं। भ्रष्टाचार प्रदेश में एक बड़ा मुद्दा है और खेमका की छवि भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी की है। ऐसे में उनकी छवि धूमिल करने के लिए यह मामला राजनीतिक तौर पर तो नहीं खोला गया। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं।