वहीं, घोटाले की मुख्य केंद्र करनाल जिले का रिकॉर्ड भी गायब है, क्योंकि करनाल में अतिरिक्त रजिस्ट्रार (एआर) अनु कौशिश और डिप्टी रजिस्ट्रार (डीआर) रोहित गुप्ता ने सेवाएं दी हैं। अनु कौशिश घोटाले की मुख्य कड़ी है। इनके अलावा झज्जर और पानीपत का रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। आशंका जताई जा रही है कि घोटाले को दबाने के लिए रिकॉर्ड खुर्द बुर्द कर दिया गया है। उधर, एसीबी की टीमों ने संबंधित जिला कार्यालयों में पहुंचकर रिकॉर्ड कब्जे में लेना शुरू कर दिया है।
आईसीडीपी में 2005 से अब तक 182 करोड़ रुपये खर्च
सहकारिता विभाग में आईसीडीपी योजना के तहत 2005 से लेकर अब प्रदेशभर में कुल 182 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि, हरियाणा को इस योजना में नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनसीडीसी) के तहत कुल 251 करोड़ रुपये अलॉट हुए थे। अभी विभाग ने 68 करोड़ खर्च नहीं किए हैं। एसीबी अभी 2018 के बाद के मामलों की जांच कर रही है। अगर जांच का दायरा बढ़ा तो 2005 से लेकर अब तक की जांच में कई और गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।