पंजाब का नाम आते ही लोगों के दिमाग में हरियाली से भरपूर खेत-खलिहान और आत्मनिर्भर-खुशहाल किसान की तस्वीर छा जाती है लेकिन अब कनाडा और अन्य देशों का क्रेज किसानों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस राज्य ने फसल उत्पादन में कई रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन अब डॉलरों की चमक दमक की दीवानगी ने यहां के किसानों को कर्ज के जाल में फंसाना शुरू कर दिया है।
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हालात यह हैं कि पिछले साल औसतन पंजाब के प्रति किसान पर 2 लाख तीन हजार रुपये कर्ज था और देश में तीसरे नंबर पर था लेकिन अब ताजा स्थिति में पंजाब के किसान देश में सबसे अधिक कर्जदार हो गए हैं। ताजा आंकड़ों में पंजाब में औसतन किसान पर कर्जा 2 लाख 95 हजार रुपये जा पहुंचा है।
वहीं, राज्य से कनाडा जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी डेढ़ लाख तक जा पहुंची है। पंजाब के किसानों का सामूहिक कर्ज, जो 1997 में 5,700 करोड़ रुपये था, 2002 में बढ़कर 9,886 करोड़ रुपये, 2005 में 21,064 करोड़ रुपये और 2015 में 35,000 करोड़ रुपये हो गया। पिछले आठ साल में दोगुना से अधिक होकर 74 हजार करोड़ तक जा पहुंचा है। यह तो वह आंकड़े हैं जो सहकारी बैंकों के हैं इसके अलावा आढ़ती व साहूकारों से अलग से कर्ज किसानों द्वारा उठाया गया है। अगर उस कर्ज को भी जोड़ लिया जाए तो यह डेढ़ लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है। पंजाब में प्रति किसान संस्थागत कर्ज देश में सबसे ज्यादा 2.95 लाख रुपये है। वाणिज्यिक, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से 24,92,663 किसानों ने 73,673.62 करोड़ रुपये का ऋण लिया है।
गुजरात में प्रति किसान संस्थागत ऋण 2.28 लाख रुपये है, जो देश में दूसरे स्थान पर है, इसके बाद हरियाणा में 2.11 लाख रुपये और आंध्र प्रदेश में 1.72 लाख रुपये है। हालांकि पिछले साल कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने लोकसभा में जो आंकड़े रखे थे उसमें आंध्र प्रदेश के किसान पर औसतन सबसे अधिक कर्ज 2,45,554 रुपये था और पंजाब तीसरे नंबर पर था, जहां पर किसान पर कर्ज 2 लाख 03 हजार रुपये औसतन प्रति किसान था, लेकिन एक साल में ही पंजाब में किसान कर्ज के मामले में नंबर एक पर आ गए हैं।
पंजाब में किसानों के बच्चे अधिक विदेशों की तरफ भाग रहे : रमन
एयर कारपोरेट के एमडी रमन कुमार का कहना है कि पंजाब में किसानों के बच्चों में विदेश जाने का काफी अधिक क्रेज है। दरअसल काफी साल पहले सिर्फ दोआबा के लोगों में विदेश का क्रेज था लेकिन अब पिछले कुछ सालों से माझा व मालवा पूरी तरह से चपेट में आ चुका है जहां पर अधिकतर किसान हैं। पंजाब से कनाडा और यूके और ऑस्ट्रेलिया ने जिस तरह से स्टडी वीजा में काफी रिलेक्स दिया है, उसका पंजाब के ग्रामीण इलाकों में खासा असर हुआ है और बच्चे स्टडी के लिए विदेश जा रहे हैं।
पंजाब में 2016 से फरवरी 2023 के बीच 11 लाख बच्चे स्टडी के लिए विदेश जा चुके हैं। विदेशों में पढ़ाई का एक छात्र पर औसतन 15 से 30 लाख रुपये वार्षिक खर्च आता है, जिसमें खाने-पीने व कमरे का किराया शामिल है। एक छात्र पर औसतन 15 लाख खर्च मान भी लिया जाए तो पंजाब से हर साल 15 हजार करोड़ रुपये बतौर फीस बाहर भेजी जा रही है। पंजाब की आर्थिक व्यवस्था का आधार तो खेतीबाड़ी ही है।
85 फीसदी किसानों के पास पांच एकड़ से नीचे जमीन : कोकरीकलां
बीकेयू उगराहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां का कहना है कि पंजाब का किसान क्या करे? 85 फीसदी किसानों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है, उस पर खेतीबाड़ी कर वह पशुओं का चारा भी निकाल नहीं पाएगा। अब किसानी काफी महंगी हो गई है, बीज से लेकर खाद महंगी हो चुकी हैं। किसान के पास विकल्प क्या है? बच्चों के सुनहरी भविष्य के लिए विदेश का रास्ता ही बचता है।
सरकार की बेरुखी के कारण पंजाब के किसानों ने विदेशों का रुख किया : प्रो. बराड़
पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के प्रो. हरी सिंह बराड़ का कहना है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि पंजाब का किसान कर्ज के बोझ से निकले। सरकार की बेरुखी के कारण ही किसानों व उनके बच्चों का विदेशों में पलायन हो रहा है। अब कनाडा के ब्रैंप्टन व बीसी में घर लेना कोई आसान नहीं है, वहां छोटे से छोटा घर भी भारतीय मुद्रा में 7 करोड़ से कम का नहीं है। कहां से आएगा पैसा? किसानों को कर्ज लेना ही पडे़गा।
पंजाब में तो कभी खेतीबाड़ी को प्रोत्साहित ही नहीं किया गया। किसानों की फसलें खराब होती हैं और पूरा साल मेहनत कर जब पैसा नहीं मिलता तो किसान क्या करेगा? आंकड़ों को देखो, जो बच्चे बाहर जा रहे हैं वह मध्यमवर्गीय परिवारों के हैं। अमीर के बच्चे तो विदेश जा ही नहीं रहे हैं और किसान अमीर नहीं है।
जमीन पर आकर देखो तो सही, नशा कितना फैला है..
बच्चों को कनाडा में सैटल करने वाले किसान बलवंत सिंह का कहना है कि जमीन पर आकर देखो गांवों में नशा कितना है। युवाओं के लिए रोजगार नहीं है, हम सीमावर्ती सूबे में बैठे हैं। पंजाब की तरक्की कैसे होगी? आज का युवा पंजाब में मौजूदा हालात से काफी परेशान है और यही वजह है कि युवा यहां पर रहने के लिए तैयार नहीं है और पंजाब से अधिकतर किसानों के बच्चों ने विदेशों का रुख किया है। किसानी का धंधा अब मुनाफे वाला नहीं रहा है।