किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि भारत सरकार डब्ल्यूटीओ के दबाव में है और सूखे मेवों सहित गेहूं आदि पर आयात शुल्क को कम और समाप्त कर विदेशी कृषि उत्पादों को भारत में आयात करने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचा रही है। इससे भारत में कृषि वस्तुओं की कीमतों में भारी गिरावट आएगी और पहले से ही आत्महत्या के रास्ते पर चल रहे किसानों की हालत और खराब होगी।
भारत माला सड़क परियोजना के तहत किसानों की जमीनें जबरन कौड़ियों के भाव छीनकर कॉरपोरेट घरानों को दी जा रहीं हैं, जबकि पंजाब में ऐसे किसी अन्य हाईवे की जरूरत ही नहीं है। कई किसानों ने मुआवजे का पैसा भी नहीं लिया है। किसान नेताओं ने पंजाब सरकार पर पराली प्रबंधन के लिए कोई आर्थिक मदद न देने का आरोप लगाया और कहा कि प्रदूषण कंट्रोल के नाम पर केंद्र से मुआवजे के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है और किसानों से करोड़ों रुपये जुर्माने के रूप में वसूले जा रहे हैं।
ये हैं किसानों की प्रमुख मांगें
कर्नाटक के जाने-माने किसान नेता कुर्बुर शांता कुमार और बिहार के अरुण सिन्हा ने किसानों की पूर्ण कर्ज माफी, एमएसपी गारंटी, बिजली संशोधन बिल न लागू करने, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने, कुदरती आफत से बर्बाद फसलों और गन्ना काश्तकारों को पूरा मुआवजा देने, किसान आंदोलन में शहीद किसान परिवारों की मदद और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने समेत लखीमपुर खीरी में किसानों और पत्रकार की हत्या मामले के आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाने की मांग की।
किसान महापंचायत को नेता काका सिंह कोटड़ा, जसवीर सिंह सिद्धूपुर, मेहर सिंह थेड़ी, मान सिंह राजपुरा, अभिमन्यु कोहाड़, रवि दत्त (मध्य प्रदेश), जरनैल सिंह, लखविंदर सिंह (हरियाणा), बलदेव सिंह सिरसा, सुखजिंदर सिंह, गुरदास सिंह ने भी संबोधित किया।